RTI से सामने आई जानकारी के आधार पर वरिष्ठ अधिवक्ता मनोज सिंह ठाकुर ने उठाए वित्तीय अनियमितताओं के सवाल, रायपुर स्मार्ट सिटी में 1.82 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट फंड से प्रशासनिक खर्च का दावा, CAG ऑडिट की मांग
रायपुर। देश के 100 स्मार्ट शहरों को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने के उद्देश्य से शुरू किए गए स्मार्ट सिटी मिशन की समय-सीमा समाप्त होने के बाद भी हजारों करोड़ रुपये के विकास कार्य अधूरे हैं। भारत सरकार के आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय से सूचना का अधिकार (RTI) के तहत प्राप्त जानकारी के आधार पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता मनोज सिंह ठाकुर ने राष्ट्रीय स्तर पर परियोजनाओं की स्थिति और रायपुर स्मार्ट सिटी के वित्तीय प्रबंधन पर सवाल उठाए हैं। उनके अनुसार, 31 मार्च 2025 को मिशन समाप्त होने के बावजूद देशभर में 8,047 करोड़ रुपये की लागत वाले 259 प्रोजेक्ट अब भी निर्माणाधीन हैं।
अधिवक्ता मनोज सिंह ठाकुर द्वारा जारी दस्तावेजों के अनुसार, देश के 100 स्मार्ट शहरों में कुल 8,064 परियोजनाएं स्वीकृत की गई थीं, जिनकी अनुमानित लागत 1,64,811 करोड़ रुपये थी। इनमें से 7,805 परियोजनाएं पूर्ण दर्ज हैं, जबकि 259 परियोजनाएं अब भी कार्यान्वयन की स्थिति में हैं। इन अधूरे कार्यों की लागत 8,047 करोड़ रुपये बताई गई है।
छत्तीसगढ़ के दो शहरों में 188 करोड़ के कार्य लंबित
आरटीआई से प्राप्त जानकारी के अनुसार, छत्तीसगढ़ के रायपुर और बिलासपुर में भी स्मार्ट सिटी मिशन के तहत कई परियोजनाएं अधूरी हैं। राजधानी रायपुर में 27 करोड़ रुपये की लागत वाले तीन प्रोजेक्ट तथा बिलासपुर में 161 करोड़ रुपये की लागत वाले आठ प्रोजेक्ट लंबित बताए गए हैं। दोनों शहरों में कुल 188 करोड़ रुपये के विकास कार्य मिशन की निर्धारित समय-सीमा बीतने के बाद भी पूरे नहीं हुए हैं।
रायपुर स्मार्ट सिटी के वित्तीय प्रबंधन पर सवाल
अधिवक्ता ठाकुर ने रायपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड के वित्तीय प्रबंधन पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनके द्वारा उपलब्ध कराए गए उपयोगिता प्रमाण-पत्र (GFR-12C) के अनुसार, कार्यालयीन एवं प्रशासनिक खर्च के लिए निर्धारित राशि से अतिरिक्त 1.825 करोड़ रुपये प्रोजेक्ट फंड से उधार लेकर प्रशासनिक मद में खर्च किए जाने का उल्लेख है।
ठाकुर का कहना है कि विकास कार्यों के लिए निर्धारित राशि का प्रशासनिक खर्च में उपयोग वित्तीय नियमों के अनुरूप है या नहीं, इसकी स्वतंत्र जांच की जानी चाहिए। उन्होंने इस मामले को वित्तीय पारदर्शिता से जुड़ा गंभीर विषय बताया है।
रायपुर को 37 करोड़ रुपये कम मिलने का दावा
अधिवक्ता द्वारा आरटीआई के आधार पर यह भी दावा किया गया है कि जबलपुर, इंदौर, भुवनेश्वर और नागपुर जैसे शहरों को केंद्र से 490-490 करोड़ रुपये जारी किए गए, जबकि रायपुर को 453 करोड़ रुपये ही प्राप्त हुए। उन्होंने लगभग 37 करोड़ रुपये के अंतर का कारण स्पष्ट करने की मांग की है।
CAG ऑडिट की मांग, PIL की चेतावनी
मनोज सिंह ठाकुर ने स्मार्ट सिटी मिशन के अंतर्गत हुए कार्यों, फंड के उपयोग और परियोजनाओं में देरी की नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) से फॉरेंसिक ऑडिट कराने की मांग की है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में सतर्कता आयोग को पत्र भी भेजा गया है।
ठाकुर ने कहा कि स्मार्ट सिटी मिशन के नाम पर जनता की बड़ी राशि खर्च की गई है, ऐसे में अधूरे प्रोजेक्ट और वित्तीय प्रबंधन से जुड़े सवालों का जवाब मिलना आवश्यक है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मामले में शीघ्र जांच शुरू नहीं होती है, तो जनहित में उच्च न्यायालय में जनहित याचिका (PIL) दायर की जाएगी।
स्मार्ट सिटी मिशन के अधूरे कार्यों और वित्तीय उपयोग से जुड़े इन सवालों पर संबंधित विभागों तथा रायपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद मामले की स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
