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अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज को मिली मान्यता, इसी सत्र से होंगे दाखिले, कॉलेज में 100 सीटें मंजूर

00 पुराने सैनिक स्कूल भवन का उपयोग मेडिकल कॉलेज के रूप में होगा
00 अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज को मिलाकर राज्य में कुल 800 सीटें
रायपुर / डॉक्टर की पढ़ाई करने वाले 100 और छात्रों को प्रदेश में प्रवेश मिल सकेगा। अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज को मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) ने मान्यता दे दी है।

केन्द्र सरकार ने भारतीय चिकित्सा परिषद (एम.सी.आई.) की अनुशंसा पर छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग के मुख्यालय अम्बिकापुर में शासकीय मेडिकल कॉलेज में चालू सत्र 2016-17 में दाखिले के अनुमति प्रदान कर दी है। इस कॉलेज को भारतीय चिकित्सा परिषद से एम.बी.बी.एस. की एक सौ सीटों के लिए मान्यता मिल गयी है। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह द्वारा केन्द्र सरकार के स्तर पर लगातार की गयी पहल और स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री अजय चन्द्राकर के विशेष प्रयासों से ही यह संभव हो सका है। मुख्यमंत्री और चिकित्सा शिक्षा मंत्री ने इसके लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी.नड्डा के प्रति आभार प्रकट किया है।
चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार इन्हें मिलाकर अब प्रदेश में एम.बी.बी.एस. के सीटों की संख्या 800 तक पहुंच जाएगी। इनमें से 650 सीटें छह शासकीय मेडिकल कॉलेजों के लिए और 150 सीट एक प्राइवेट मेडिकल कॉलेज के लिए निर्धारित हैं। सरगुजा मेडिकल कॉलेज में चालू सत्र से ही पी.एम.टी. चयनित होने वाले विद्यार्थियों को प्रवेश देने की तैयारी की जा रही है। अधिकारियों ने बताया कि प्रवेश प्रक्रिया एक अगस्त 2016 से शुरू हो जाएगी। केन्द्र सरकार द्वारा दो दिन पहले इस महीने की 15 तारीख को अम्किापुर (सरगुजा) मेडिकल कॉलेज में शिक्षा सत्र 2016-17 से प्रवेश की अनुमति प्रदान की गयी है। सरगुजा संभाग के अम्बिकापुर का मेडिकल कॉलेज छत्तीसगढ़ का छठवां सरकारी ऐलोपैथिक मेडिकल कॉलेज होगा। रायपुर के जवाहर लाल मेडिकल कॉलेज और बिलासपुर के छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) सहित रायगढ़, जगदलपुर, राजनांदगांव में भी शासकीय मेडिकल कॉलेज खोले गए हैं। इनमें से जगदलपुर मेडिकल कॉलेज का शुभारंभ वर्ष 2006 मे, रायगढ़ मेडिकल कॉलेज का शुभारंभ 2013 में और राजनांदगांव मेडिकल कॉलेज का शुभारंभ वर्ष 2014 में हुआ।
अधिकारियों ने बताया कि शासकीय मेडिकल कॉलेज अंबिकापुर को पहले तकनीकी कारणों से मान्यता नहीं मिल पाई थी, इसके लिए अंबिकापुर स्थित पुराने सैनिक स्कूल भवन का उपयोग मेडिकल कॉलेज के रूप में होगा। मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के मापदण्ड के अनुरूप सैनिक स्कूल भवन को मेडिकल कॉलेज का रूप देने के लिए स्थानीय जिला प्रशासन ने भरसक प्रयास किए और थोड़े ही समय में इस भवन का नवीनकरण कर डाला। इसके साथ ही मेडिकल कॉलेज अंबिकापुर के लिए स्टाफ की भी कमी थी, इस कमी को दूर करने के लिए अन्य मेडिकल कॉलेजों से स्टाफ अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज स्थानांतरित किया गया। अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज जल्द से जल्द शुरू हो सके और सभी तकनीकी दिक्कतों को दूर करने में स्वास्थ्य मंत्री अजय चन्द्राकर ने व्यक्तिगत रूचि ली। इसके साथ ही अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज की सारी परिस्थितियों से केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा को मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह और प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री चन्द्राकर लगातार अवगत कराते रहे।
स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा मंत्री अजय चन्द्राकर ने बताया कि राज्य बनने के बाद प्रदेश में एम.बी.बी.एस. की 800 सीटें हो जाना अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है। लगातार डाक्टरों की कमी से जझ रहे प्रदेश व देश को अब छत्तीसगढ़ से ही 800 डाक्टरों की खेप मिल सकेगी और दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों को अच्छा से अच्छा उपचार दिलाने की दिशा में प्रदेश अब एक कदम और आगे बढ़ गया है।

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