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जयपुर / जयपुर में सांप्रदायिक सौहार्द की एक नायाब मिसाल सामने आई है। यहां मजहब की दीवार को तोड़कर एक हिंदू और एक मुस्लिम युवक ने एक दूसरे की पत्नियों को किडनी दान कर उनकी जान बचाई है।
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अनिता और तसलीम नाम की महिलाएं कुछ वक्त पहले तक ये एकदूसरे को जानती तक नहीं थीं। दोनों को ही किडनी की समस्या थी। दोनों को ही डॉक्टरों ने किडनी बदलवाने की सलहा दी थी। अनिता और तसलीम के पति किडनी के लिए काफी भागदौड़ कर रहे थे। कोई इन्हें किडनी देने को तैयार भी हुआ तो जांच में सही नहीं पाई गईं। विनोद मेहरा अनिता के पति विनोद मेहरा और तसलीम के पति अनवर बताते हैं कि जांच के दौरान डॉक्टरों को किसी दोनों परिवारों में किसी तरह की संभावना का पता चला तो डॉक्टरों ने उनके परिवारों से बात की। इन दोनो ही परिवारों ने बिना किसी संकोच के किडनी दान पर काम करना शुरु किया। दो सितंबर को आपरेशन करके विनोद की किडनी तसलीम में और अनवर की किडनी अनिता में प्रत्यारोपित कर दी।
यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि मजहब दो इंसानों को अलग नहीं करता है।
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सांप्रदायिक सौहार्द की एक नायाब मिसाल, हिंदू और मुस्लिम ने एक-दूसरे को किया अंगदान
