00 12 अक्टूबर 2005 को इस अधिनियम के लागू होने के 120 दिन के भीतर इसे सभी विभाग को लागू करना था
00 राजकुमार मिश्रा ने इस धारा का पालन करने के लिए छ0ग0 उच्च न्यायायलय में लगाया था याचिका
00 आरटीआई कार्यकत्र्ता 24.09.2012 को HC ने दिया था आदेश इसे अगले 6 माह में लागू करे
कोरिया / आरटीआई कार्यकत्र्ता राजकुमार मिश्रा ने छ0ग0 सामान्य प्रशासन विभाग महानदी भवन मंत्रालय रायपुर के सचिव श्रीमती निधि छिब्बर को पत्र लिखकर सूचना का अधिकार की धारा 4(1)क तथा ख का पालन करने का अनुरोध किया है। इस अनुरोध पत्र को छ0ग0 सामान्य प्रशासन सूचना का अधिकार प्रकोष्ठ को अंतरिम कर इस धारा का पालन करने के लिए प्रेषित किया गया है।
चिरमिरी निवासी आरटीआई कार्यकत्र्ता राजकुमार मिश्रा ने छ0ग0 सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव को पत्र लिखकर सूचना का अधिकार कानून व छ0ग0 उच्च न्यायालय में मिश्रा के जनहित याचिका पर आदेश का पालन कराने हेतु प्रदेश के सभी विभागों के लोक सूचना अधिकारियों को 4(1)ब का पालन करने हेतु सख्त निर्देश देने का लेख किया गया है।
आरटीआई कार्यकत्र्ता ने अपने पत्र में लिखा है कि सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की धारा-4(1) क में प्रवधान किया गया है कि प्रत्येक लोक प्राधिकारी अपने समस्त जानकारियों को एैसी रीति से रखेगा जिससे सूचना का अधिकार सुकर बनाया जा सके। इसी धारा की उपधारा-ख में प्रवधान किया गया है कि इस अधिनियम के लागू होने के 120 दिन (12.10.2005 को लागू हुआ) अर्थात 11.02.2006 तक 17 बिंदुओं की जानकारी अपने वेबसाईट पर डालना है। आरटीआई कार्यकत्र्ता को प्राप्त जानकरी के अनुसार प्रदेश के कई विभाग आज दिनांक तक ना तो अपना वेबसाईट बनाये है ना ही सूचना का अधिकार के इस धारा का पालन कर रहे है। विभाग बार-बार इस धारा का पालन करने का निर्देश देता रहा है। आरटीआई कार्यकत्र्ता राजकुमार मिश्रा के जनहित याचिका पर छ0ग0 उच्च न्यायालय द्वारा दिनांक 24.09.2012 को यह निर्देषित किया था कि 6 माह के भीतर सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 4 का पालन करना सभी विभाग सुनिष्चित करें। प्रदेश के लगभग सभी विभाग आज दिनांक तक ना तो उक्त अधिनियम का पालन कर रहे है और ना ही छ0ग0 उच्च न्यायालय के आदेश का। उनका यह कृत न्यायालय के आदेश की अवमानना की श्रेणी में आता है। आरटीआई कार्यकत्र्ता ने अपने पत्र में आगे लिखा है कि सूचना का अधिकार की धारा-2 (च) में सूचना का परिभाषा दिया गया है इसमें किस – किस तरह की चीजें सूचना के अंतर्गत आती है बताया गया है। (झ) में किस तरह की चीजें अभिलेख में आता है बताया गया है। इस अधिनियम की धारा 4 में 17 बिंदुओं के स्वप्रगटीकरण सूचना के संबंध में बताया गया है। धारा 8 में किस तरह की सूचनाऐं नही दिया जाना है ब्याख्या किया गया है। धारा 11 में तृतीय पक्ष से संबंधित है तथा धारा 24 में कुछ संगठनों को छुट प्रदान किया गया है। इस तरह जो सूचनाऐं धारा 8, 11 व 24 में वर्जित किया गया है उन्हें छोडकर शेष जानकारियां धारा 4(1)ब में आती है। इस संबंध में 4(1)ब की उपधारा-14 और 17 विशेष रूप से उल्लेखनीय है, इस उपधारा के अनुसार प्रत्येक सूचना जो इलेक्ट्रानिक रूप से धारित हो व एैसी सूचना जो विधित किया जाए प्रकाषित करना अनिवार्य है। इस तरह प्रदेष के सभी विभागों को 4(1)ब का पालन करते हुए अपनी संपूर्ण वांछित जानकारी बेवसाइट पर डालना होगा।
आरटीआई कार्यकत्र्ता मिश्रा ने सूचना का अधिकार के इस धारा का पालन करने से होने वाले लाभ भी लिखा है। इस प्रकार की जानकारियां बेवसाइट पर डालने से अपार जनसमूह को लाभ होगा। इन विभागों के लोक सूचना अधिकारी व सरकारी सेवकों का जो समय सूचना के संकलन व सत्यापित करने में बितता हैे बचेगा जिसमें अन्य कार्य कर सकेगें। प्रथम व द्वितीय में आम जनता का लगने वाला धन बचेगा। प्रदेष के सूचना आयोग में लंबित प्रकरणों की संख्या कम होगी, प्रकरणों का निराकरण शीघ्रता से हो सकेगा और विभिन्न विभागों के लोक सूचना अधिकारियों पर लगने वाला अर्थ दण्ड तथा प्रथम अपीलीय अधिकारियों के विरूद्ध होने वाला अनुषासनात्मक कार्यवाहीयों का अनुशंसा रूकेगा। इस अधिनियम की धारा-4(1)ब पालन करने से सबसे महत्वपूर्ण है कागज बचेगा क्योंकि कागज बनाना पर्यावरण पेड पौधों और पानी पर सीधा-सीधा अत्याचार है।
आरटीआई कार्यकत्र्ता राजकुमार मिश्रा के इस अभयावेदन को छ0ग0 शासन सूचना का अधिकार प्रकोष्ठ के सचिव विकास शील को प्रेषित कर उनसे इस धारा का पालन करने के संबंध में लिखा गया है।
