Advertisement Carousel

मामला झोलाछाप डाक्टरों व फर्जी नर्सिंग होम संचालन का – जनहित याचिका लगाने वाले याचिकाकर्ता को मिलने लगी जान से मारने की धमकी

रिपोर्ट / मुकेश विश्वकर्मा / 9981361600

पेंड्रा / बिलासपुर जिले के पेंड्रा, गौरेला और मरवाही सहित प्रदेशभर में अवैध रूप से इलाज करने वाले और क्लीनिक नर्सिंग होम संचालित होने के खिलाफ कार्यवाही करने को लेकर जनहित याचिका लगाने वाले याचिकाकर्ता को अब धमकियां मिलनी शुरू हो गयी है।

              दरअसल मरवाही के सिवनी गांव के रहने वाले मधुकर द्विवेदी ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में याचिका लगाकर बिलासपुर जिले के पेंड्रा गौरेला और मरवाही सहित जिले में और प्रदेश भर में अवैध रूप से इलाज करने वाले झोलाछाप डाक्टरों, क्लीनिक तथा नर्सिंग होम संचालकों के खिलाफ कार्यवाही करने को लेकर याचिका लगायी थी जिस पर हाईकोर्ट ने बिलासपुर समेत प्रदेशभर के CMO और स्वास्थ्य सचिव को भी इनके खिलाफ कार्यवाही करने और प्रतिवेदन प्रस्तुत करने का निर्देश दिया, जिसके बाद अवैध रूप से इलाज करने वाले के खिलाफ कार्यवाही तो शुरू हुयी पर इसके बाद याचिकाकर्ता मधुकर द्विवेदी को इस पेशे से जुड़े लोगों के द्वारा याचिका वापस लेने और जान से मारने तक की धमकियां मिल रही है जिसकी मरवाही थाने में सूचना के बाद भी पुलिस ने एफआईआरदर्ज नही किया है। वही पुलिस के अनुविभागीय अधिकारी पुलिस नरेन्द्र बेंताल से जब हमने मामले में जानकारी ली उनका कहना है सिवनी निवासी मधुकर द्विवेदी ने एक शिकायत दर्ज करायी है जिसकी जांच जारी है और मामले में जो भी दोशी होगा उसके खिलाफ कड़ी कार्यवाही की जावेगी। वहीं याचिकाकर्ता मधुकर द्विवेदी ने बिलासपुर सीएमएचओ और तमाम BMO पर पक्षपात पूर्वक कार्यवाही करने और लेनदेन कर लोगों झोलाछाप और अवैध रुप से डॉक्टरी पेशा करने वाले लोगों को बचाने की कोशिश ही नही बल्कि हाईकोर्ट को दिखावे के लिये कार्यवाही करने का भी आरोप लगाया है वही मधुकर ने स्थानीय व जिला प्रशासन पर मिलीभगत का आरोप भी लगाया है जहां पर पहले प्रशासन ने हाईकोर्ट के निर्देश के बाद गौरेला के सबसे बड़े शोभा अस्पताल को सील करने के सप्ताह भर के भीतर ही लेनदेन कर दुबारा खोल दिये जाने के पीछे लेन – देन का आरोप भी वही याचिकाकर्ता की माने तो शोभा मल्टी स्पेस्शिटी अस्पताल में तो प्रशासन के द्वारा लगाये सील को भी प्रबंधक ने अपने से खोल लिया जबकि अस्पताल प्रबंधक के पास किसी प्रकार का कोई भी दस्तावेज नही मिला था जिसके बाद स्थानीय प्रशासन और एसडीएम ने खुद मौके पर जाकर अस्पताल को सील किया था वही सील कार्यवाही करने वाले अधिकारी मामले में चुप्पी साघे हुये है। वही याचिकाकर्ता की ओर से यह भी आरोप लगायागया है। स्थानीय डॉक्टरों सहित BMO पर भी झोलाछाप डॉक्टरों को बचा रहे है और इन्ही की सहमति में यह गोरख घंधे को ये लोग मिलकर अंजाम दे रहे है।

     mk (2)वही याचिकाकर्ता मधुकर द्विवेदी का कहना है की अगली पेशी में इन सभी तथ्यों से हाईकोर्ट को अवगत कराये जाने की बात भी कही है।

 

error: Content is protected !!