रामगढ़ / झारखण्ड – झारखंड के रामगढ़ क्षेत्र में एक ऐसा मंदिर है। जिसमें स्थापित भगवान शिव के शिवलिंग की पर जलाभिषेक स्वयं गंगा माता करती हैं। यह जलाभिषेक एक या दो दिन नहीं पूरे चौबीस घंटे होता हैं। यह आज से नहीं वर्षो से हो रही हैं। स्थानीय निवासियों कहते है कि यहां मांगी गई हर मुराद पूर्ण होती हैं।
इस मंदिर का इतिहास अंग्रेजों से भी जुड़ा हुआ हैं। प्राचीन समय में इस जगह को लोग टूटी झरना के नाम से जानते थे। जब अंग्रेज यहां पर रेलवे लाइन बिछाने का कार्य कर रहे थे। तो जमीन के अंदर कोई चीज नजर आई। जब उसको खोदा गया तो वहां पर मंदिर नजर आया।
प्राचीन समय से आज तक लोगों के बीच कौतूहल और आश्चर्य की बात यह है कि गंगा की प्रतिमा से पानी कैसे निकल रहा हैं। यह आज तक रहस्य बना हुआ हैं। साथ ही मंदिर के पास लगे हैंडपम्प रहस्यों से भरे हुए हैं। यहां पर पानी पीने के लिए हैडपम्प को चलाना नहीं पड़ता पानी वैसे ही चौबीस घंटे गिरता रहता हैं। लेकिन पास में ही नदी है जो पूरी तरह से सूखी हुई हैं। भक्तों का मानना है कि मंदिर में शिवलिंग पर गिरने वाले जल को लोग प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं। इस जल को ग्रहण करने पर मन शांत हो जाता हैं
रामगढ़ का यह मंदिर जहां मां गंगा अपने हाथों से करती हैं शिवलिंग का जलाभिषेक
