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नोटा मामले पर कांग्रेस को सुप्रीम कोर्ट ने दिया झटका

00 सुप्रीम कोर्ट ने नोटा के विकल्प पर कांग्रेस की याचिका को ठुकराया

नई दिल्ली / राज्यसभा चुनाव में नोटा के इस्तेमाल पर हंगामा मचाने वाली कांग्रेस को सुप्रीम कोर्ट से भी राहत नहीं मिल पाई है। संसद में इस मामले पर शोर-गुल करने के बाद पार्टी ने सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया था, जहां चुनाव आयोग की अधिसूचना पर अंतरिम रोक लगाए जाने के अनुरोध को सर्वोच्च न्यायालय ने ठुकरा दिया। सर्वोच्च अदालत ने कांग्रेस की दलील पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि नोटा 2014 से ही लागू है और तब से इसे चुनौती क्यों नहीं दी गई। कांग्रेस ने राज्यसभा चुनावों में नोटा के इस्तेमाल पर यह कहकर आपत्ति व्यक्त की है कि इससे अप्रत्यक्ष चुनाव की भावना को ठेस पहुंचती है। चुनाव आयोग ने भी इस फैसले का हवाला देते हुए नोटा पर किसी प्रकार की समीक्षा से इंकार किया है।

सर्वोच्च अदालत ने वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल के उस तर्क को भी सिरे से खारिज दिया जिसमें कहा गया था कि इससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलेगा।
इस दौरान महाधिवक्ता केके वेणुगोपाल ने कहा कि 24 जुलाई के चुनाव आयोग की अधिसूचना का केंद्र से कोई लेना-देना नहीं है। सर्वोच्च न्यायालय ने सारी दलीलों को सुनने के बाद इस मामले पर अगली सुनवाई 13 सितंबर को करेगी।

कांग्रेस ने राज्यसभा चुनावों में नोटा के इस्तेमाल पर यह कहकर आपत्ति व्यक्त की है कि इससे अप्रत्यक्ष चुनाव की भावना को ठेस पहुंचती है। चुनावों में नोटा को लागू करने के लिए जनवरी 2014 में निर्देश दिए गए थे। जिसे साल 2013 में सर्वोच्च न्यायालय के वोटिंग मशीनों में नोटा के विकल्प को अनिवार्य बनाए जाने के फैसले के बाद जारी किया गया था। चुनाव आयोग ने भी इस फैसले का हवाला देते हुए नोटा पर किसी प्रकार की समीक्षा से इंकार किया है। इस बीच भाजपा ने इस मुद्दे पर कांग्रेस के रुख की कड़ी आलोचना की है।

नोटा को लेकर कांग्रेस के रवैये को गुजरात में होने वाले राज्यसभा चुनावों से भी जोड़कर देखा जा सकता है, जहां सोनिया गांधी के करीबी अहमद पटेल की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। कांग्रेस की बौखालट इसलिए भी जाहिर हो रही है क्योंकि अभी हाल ही में वरिष्ठ नेता शंकर सिंह वाघेला ने पार्टी को छोड़ा है और उसके कई विधायकों ने राष्ट्रपति चुनाव में एनडीए उम्मीदवार को मतदान किया।

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