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बस्तर में गूंजा तिरंगे का संदेश, नारायणपुर से शुरू हुई तिरंगा यात्रा

नारायणपुर। बस्तर में शांति, एकता और राष्ट्र निर्माण का संदेश लेकर बुधवार को नारायणपुर से ‘बस्तर तिरंगा यात्रा 2026’ का शुभारंभ हुआ। उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा और वन मंत्री एवं नारायणपुर विधायक केदार कश्यप ने बाइक पर तिरंगा लेकर यात्रा का नेतृत्व किया। विभिन्न समाज प्रमुखों ने हायर सेकेंडरी स्कूल ग्राउंड से यात्रा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि यह यात्रा उन इलाकों से होकर गुजर रही है, जो लंबे समय तक नक्सली हिंसा से प्रभावित रहे हैं। यात्रा के जरिए यह संदेश दिया जा रहा है कि अब इन क्षेत्रों में नक्सलवाद का अंत हो चुका है और बस्तर विकास की नई दिशा में आगे बढ़ रहा है। यात्रा का समापन 14 अगस्त को बीजापुर जिले की कर्रेगुट्टा पहाड़ी पर तिरंगा फहराकर होगा।

शर्मा ने कहा कि बस्तर के दुर्गम गांवों में अब राष्ट्रीय पर्वों पर तिरंगा फहराया जा रहा है। इस स्वतंत्रता दिवस पर बस्तर संभाग के 90 से अधिक ऐसे गांवों में पहली बार तिरंगा लहराएगा, जहां आजादी के बाद से राष्ट्रीय ध्वज नहीं फहराया गया था। उन्होंने कहा कि तिरंगा फहरने का अर्थ है कि संविधान की पहुंच बस्तर के हर कोने तक सुनिश्चित हो रही है।

उन्होंने कहा कि कभी राष्ट्रीय पर्वों पर माओवादियों के फरमान के चलते घरों में काले झंडे लगाए जाते थे, लेकिन आज बस्तर के घर-घर में तिरंगा दिखाई दे रहा है। उन्होंने इसका श्रेय बस्तर के लोगों के मनोबल और सुरक्षा बलों के साहस को दिया।

गृह मंत्री ने कहा कि बस्तर में अब सड़क, शिक्षा, कौशल विकास, लघु वनोपज के प्रसंस्करण, रोजगार और सुरक्षा के क्षेत्र में योजनाबद्ध तरीके से काम हो रहा है। विकास कार्यों में गुणवत्ता से समझौता करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि जिन इलाकों को कभी नक्सल गतिविधियों का केंद्र माना जाता था, उन्हीं क्षेत्रों से आज तिरंगा यात्रा निकल रही है। यात्रा के दौरान उन स्थानों की मिट्टी भी एकत्रित की जाएगी, जहां जवानों और नागरिकों ने शहादत दी है। इस मिट्टी का उपयोग भविष्य में बनने वाले स्मारक में किया जाएगा।

पहले दिन यात्रा नारायणपुर से मुंजमेटा, झारागांव, धौड़ाई, कन्हारगांव, कड़ेनार, बोदली, सातधार और बारसुर होते हुए दंतेवाड़ा पहुंची। दूसरे दिन यात्रा दंतेवाड़ा से सुकमा और बीजापुर के विभिन्न नक्सल प्रभावित क्षेत्रों से गुजरेगी। तीसरे दिन बीजापुर से आवापल्ली, उसूर, गलगम, नंबी और ताड़पाला होते हुए कर्रेगुट्टा पहाड़ी पहुंचेगी, जहां यात्रा का समापन होगा।

यात्रा में बड़ी संख्या में युवा, जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी शामिल हुए।

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