बाल अधिकार संरक्षण के क्षेत्र में नवाचार के लिए राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग सम्मानित
रायपुर, 26 सितंबर। छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग को बाल अधिकारों के संरक्षण और संवर्धन के क्षेत्र में किए गए अभिनव प्रयास के लिए राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिला है। आयोग के ‘रक्षक’ कार्यक्रम को प्रतिष्ठित SKOCH गोल्ड अवार्ड से सम्मानित किया गया है। आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा के नेतृत्व में यह उपलब्धि हासिल हुई।
आयोग के अनुसार, बाल अधिकारों के क्षेत्र में यह सम्मान प्राप्त करने वाला छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य है। SKOCH ग्रुप के चेयरमैन समीर कोचर ने यह पुरस्कार प्रसिद्ध पर्यावरणविद् सुनीता नारायण, पॉपुलेशन फाउंडेशन ऑफ इंडिया की पूनम मुटरेजा, भारत सरकार के पूर्व सचिव संजय कुमार और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के पूर्व महासचिव भरत लाल की मौजूदगी में प्रदान किया।
डॉ. वर्णिका शर्मा ने बताया कि अवार्ड के लिए चयन प्रक्रिया कई चरणों में हुई। आयोग की ओर से जूरी के समक्ष ‘रक्षक’ पाठ्यक्रम का विस्तृत प्रस्तुतीकरण किया गया। इसके बाद कड़े मूल्यांकन और परीक्षण के बाद इसे गोल्ड श्रेणी के लिए चुना गया।
एक साल का डिप्लोमा, फील्ड वर्क पर जोर
‘रक्षक’ का पूरा नाम Post Graduation Diploma in Protection of Child Rights (PGDPCR) है। यह एक वर्षीय दो सेमेस्टर का डिप्लोमा पाठ्यक्रम है, जिसमें प्रवेश के लिए न्यूनतम योग्यता स्नातक निर्धारित की गई है। इसका उद्देश्य बाल संरक्षण के क्षेत्र में प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करना है।
इस पाठ्यक्रम की खासियत इसका प्रैक्टिकल मॉडल है। विद्यार्थियों को केवल सैद्धांतिक जानकारी देने के बजाय बाल कल्याण समिति, किशोर न्याय बोर्ड, चाइल्ड केयर संस्थानों और स्वयंसेवी संगठनों के साथ जोड़कर फील्ड वर्क, केस स्टडी और प्रोजेक्ट रिपोर्ट पर काम कराया जाएगा।
पाठ्यक्रम में POCSO एक्ट, किशोर न्याय अधिनियम-2015, बाल विवाह एवं बाल श्रम निषेध, दत्तक ग्रहण कानून, शिक्षा का अधिकार अधिनियम-2009 और बाल पुनर्वास योजनाओं जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल किए गए हैं।
आयोग के मुताबिक यह पाठ्यक्रम प्रदेश के विभिन्न विश्वविद्यालयों में उनके बोर्ड अथवा परिषद की अनुमति से शुरू किया जा रहा है। इससे बाल संरक्षण, काउंसलिंग और सामाजिक कार्य के क्षेत्र में युवाओं के लिए रोजगार एवं विशेषज्ञता के नए अवसर खुलने की उम्मीद है।
SKOCH अवार्ड की स्थापना वर्ष 2003 से सुशासन, डिजिटल गवर्नेंस और प्रशासनिक सुधारों के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्यों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान देने के लिए की जाती है।
