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अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग के हित में रमन सरकार का ऐतिहासिक फैसला : विभिन्न जाति समूहों में शामिल जातियों के नामों में उच्चारण विभेद मान्य किया गया

** जाति प्रमाण पत्र जारी करना अब होगा आसान
रायपुर / मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की अध्यक्षता में आज दोपहर यहां मंत्रि परिषद की बैठक में राज्य की अनुसूचित जनजातियों और अनुसूचित जातियों के लाखों लोगों के हित में एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया गया। विधानसभा के मुख्य समिति कक्ष में आयोजित बैठक के बाद मुख्यमंत्री डॉ. सिंह ने अपरान्ह सदन में इस फैसले की जानकारी दी।

उन्होंने सदस्यों को बताया कि मंत्रि परिषद ने आज की बैठक में छत्तीसगढ़ के 27 अधिसूचित जाति समूहों के 85 उच्चारण विभेदों (फोनेटिक वेल्यूज) को मान्य करने का निर्णय लिया। इससे अब इन जाति समूहों के राजस्व अभिलेखों और अन्य अभिलेखों में दर्ज उनके जातियों के नामों में विभिन्न स्थानीय बोलियों के उच्चारण विभेदों के आधार पर जाति प्रमाण पत्र करना अधिक आसान हो जाएगा। इनमें अनुसूचित जनजाति वर्ग के 22 समूहों के 66 उच्चारण विभेद और अनुसूचित जाति के पांच समूहों के 19 उच्चारण विभेद शामिल हैं।

मुख्यमंत्री ने बताया कि छत्तीसगढ़ राज्य में अनुसूचित जनजाति के अंतर्गत 42 जाति समूह और अनुसूचित जाति के अंतर्गत 44 जाति समूह अधिसूचित किए गए हैं। यह अधिसूचना भारत सरकार के राजपत्र में हिन्दी और अंग्रेजी में प्रकाशित है। इनमें से कई जातियों के नामों में उच्चारण भेद पाए जाते हैं, जो इनके ही स्थानजनित उच्चारणगत विभेद हैं। चूंकि मूल रूप से यह अधिसूचना अंग्रेजी भाषा और लिपि में जारी हुई है तथा इसका हिन्दी अनुवाद सिर्फ हिन्दी अधिसूचना के रूप में जारी हुआ है। अतः उच्चारण भेद के कारण मूल अनुसूचित जनजाति और मूल अनुसूचित जाति के लोगों को जाति प्रमाण पत्र उनके जनजाति अथवा अनुसूचित जाति का होने के बाद भी जारी नहीं हो पा रहा था।

डॉ. रमन सिंह ने बताया कि इन कठिनाईयों को देखते हुए राज्य सरकार ने भाषविदों की चार सदस्यीय समिति का गठन किया। समिति को राज्य की अनुसूचित जनजातियों और अनुसूचित जातियों के अंग्रेजी लिपि के शब्दों के स्थानीय भाषा में ध्वन्यात्मक मानक शब्द अंकित करने के बारे में विचार करने और अनुशंसा देने की जिम्मेदारी दी गई थी। समिति ने इस महीने की 14 तारीख को राज्य सरकार को अपनी रिपोर्ट दी है। इसमें समिति ने अनुसूचित जन-जातियों में से 22 जातियों और अनुसूचित जातियों में 05 जातियों के उच्चारणगत विभेद इंगित किए हैं, जिन्हें आज मंत्रि परिषद ने विचार-विमर्श के बाद मान्य करने का निर्णय लिया। इनमें अनुसूचित जनजातियों के 22 समूहों के विभिन्न उच्चारण विभेद और अनुसूचित जातियों के पांच समूहों के 19 उच्चारण विभेद शामिल हैं। अनुसूचित जनजातियों से संबंधित प्रकरणों में – भुईंहार, भारिया, भूमिया, पण्डो, भूंजिया, बियार, धनवार, गड़ाबा, गदबा, गोंड, धुलिया, डोरिया, कंडरा, नागवंशी, हल्बा, तंवर, खैरवार, कोन्ध, कोड़ाकू, धनगड़, पठारी और सवरा जाति के अंतर्गत विभिन्न उच्चारण विभेद वाली जातियां शामिल हैं। इसी तरह अनुसूचित जाति से संबंधित प्रकरणों में औधेलिया, धारकर, चडार, गांड़ा और महार जाति समूहों में विभिन्न उच्चारण विभेद वाली जातियां शामिल है।

समिति के प्रतिवेदन पर विचार करने के बाद मंत्रिपरिषद् ने निर्णय लिया है कि संलग्न तालिका के कॉलम दो में अंग्रेजी में उल्लेखित जातियों के नामों का हिन्दी में कॉलम चार में उल्लिखित उच्चारणगत विभेद (Phonetic Values) मान्य किया जाय और सामान्य प्रशासन विभाग तद्ाशय का निर्देश नियमानुसार जाति प्रमाण-पत्र जारी करने हेतु प्रसारित करे।

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मुख्यमंत्री ने बताया कि इस निर्णय से राजस्व अभिलेखों और अन्य अभिलेखों में दर्ज विभिन्न स्थानीय बोलियों के उच्चारण विभेद के कारण जाति प्रमाण पत्र जारी करने में आ रही कठिनाईयां दूर हो जाएंगी और आवेदकों को काफी राहत मिलेगी।

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