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शिवसेना ने किया ऐलान, बीजेपी से नाता तोड़ 2019 में अकेले लड़ेगी चुनाव

नई दिल्ली / शिवसेना ने कहा है कि साल 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव में वह बीजेपी के साथ गठबंधन नहीं करेगी। पार्टी ने राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में फैसला लिया है कि वह अगले लोकसभा चुनावों में एनडीए का हिस्सा नहीं होगी। शिवसेना की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में राज्यसभा सांसद संजय राउत ने बीजेपी से अलग होने का प्रस्ताव रखा था। जिसे पार्टी ने सर्वसम्मति से मान लिया है।

पार्टी का मानना है कि बीजेपी के साथ होने से पिछले तीन साल में उसका मनोबल गिरा है। शिवसेना ने ऐलान किया है कि वह ना सिर्फ अगले लोकसभा चुनाव बल्कि महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में भी अकेले मैदान में जाएगी।

गौरतलब है कि शिवसेना और बीजेपी में तल्खी महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के बाद से ही शुरू हो गई थी। इसके बाद महाराष्ट्र नगर निकाय चुनाव के नतीजों के बाद भी शिवसेना राज्य में बीजेपी के बढ़ते कद को लेकर परेशान रही है। केंद्र की मोदी सरकार और राज्य की फडणवीस सरकार पर शिवसेना लगातार हमला करती रही है और सरकार में भी बनी रही है।

आप को बता दें कि शिवसेना ने सोमवार को आम आदमी पार्टी (आप) के दिल्ली के 20 विधायकों को ‘लाभ का पद’ धारण करने को लेकर अयोग्य करार दिए जाने में ‘जल्दबाजी’ को लेकर सवाल उठाए। शिवसेना ने कहा, “यह एक अभूतपूर्व घटना है जिसमें बहुत से चुने हुए विधायकों को थोक भाव से अयोग्य करार दे दिया गया। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल संकट का सामना कर रहे हैं और यह भ्रष्टाचार व अन्याय के खिलाफ सार्वजनिक अभियान के कारण है।”

‘चुनाव आयोग ने जल्दबाजी से कार्य किया’ –
शिवसेना ने अपने पार्टी मुखपत्र सामना और दोपहर का सामना के संपादकीय में कहा कि यहां तक कि मामले का राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने संज्ञान लिया और निर्वाचन आयोग (ईसी) की सिफारिशों पर अपनी मंजूरी की मुहर लगा दी। संपादकीय में कहा गया है कि दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के कार्यकाल में भी इसी तरह की शिकायतें थीं और यहां तक कि अभी भी कई राज्यों में हैं, लेकिन उनके पद बने हुए हैं। संपादकीय में कहा गया है कि आप के 20 विधायकों के मामले में चुनाव आयोग ने जल्दबाजी से कार्य किया और विधायकों को अपना पक्ष रखने का अवसर नहीं दिया। इस तरह की राय पूर्व ईसी अधिकारियों की भी है कि निर्वाचन आयोग ने मामले में जल्दबाजी की है। शिवसेना ने कहा, “ईसी ने विधायकों के खिलाफ शिकायत के मामले पर अपना आदेश बिना मामले की सुनवाई के या आप के 20 निर्वाचित प्रतिनिधियों को अपना पक्ष रखने का मौका रखे बगैर दिया है। यह गलत है।”

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