रिपोर्ट – रफीक अंसारी…
कोरिया / कटकोना के शिव मंदिर प्रांगण में आयोजित 7 दिवसिय श्रीमद भागवत कथा के 7 वें दिन कथा वाचक राष्ट्रिय प्रवक्ता परमार्थ आश्रम हरिद्वार के दीपू महराज ने श्रद्वालूओं को दत्तात्रेय, परिक्षित मोक्ष की कथा के साथ सुदामा चरित का प्रसंग आया जिसमें भगवान श्रीकृष्ण एवं सुदामा मित्रता व सुदामा के दीन हिन दशा व स्थिति का मार्मिक कथा सुनाते हुए प्रस्तुत की गई सुदामा एवं द्वारपाल की जिवंत झांकी व संवाद सुनते व देखने के बाद कथा स्थल पर सन्नाटा छा गया व कई श्रद्वालू जो कथा में लीन थे उनके आंखों में आंसू आ गए। कथा के अंत में कथा वाचक दीपू महराज ने श्रद्वालूओं से कहा कि भागवत पुराण हिन्दुओं के अट्ठारह पुराणों में से एक है। इसे श्रीमद् भागवत या केवल भागवतम् भी कहते हैं। इसका मुख्य विषय भक्ति योग है, जिसमें श्रीकृष्ण को सभी देवों का देव या स्वयं भगवान के रूप में चित्रित किया गया है। इस पुराण में रस भाव की भक्ति का निरूपण भी किया गया है। भगवान की विभिन्न कथाओं का सार श्रीमद् भागवत मोक्ष दायिनी है। इसके श्रवण से परीक्षित को मोक्ष की प्राप्ति हुई और कलियुग में आज भी इसका प्रत्यक्ष प्रमाण देखने को मिलते हैं। श्रीमद भागवत कथा सुनने से प्राणी को मुक्ति प्राप्त होती है। श्रीमद् भागवत कथा के श्रवण मात्र से ही प्राणी मात्र का कल्याण संभव है।

खेली गई फूलों की होली
श्रीमद् भागवत कथा के अंतिम दिन श्रीकृष्ण एवं रूकमणी जी की झांकी के साथ श्रद्वालूओं ने फूलों की होली खेली व गाए गए फाग गीतों एवं भजन की धुन पर श्रद्वालू घंटो तक नाचते एवं झूमते रहे और फूलों की होली को देखने के लिए कथा स्थल पर हजारों की संख्या में श्रद्वालू पहुंचे रहे, इस फूलों की होली का जमकर आनंद लिया।
हवन पूजन के साथ हुआ समापन
कलश यात्रा के साथ शुरू हई श्रीमद् भागवत कथा का हवन पूजन व पूर्णाहुति के साथ समापन हुआ। 7 दिनों तक श्रद्वालूओं के बैठने से लेकर विभिन्न प्रकार की तैयारियों में जुटे आयोजक मंड़ल के सभी पदाधिकारी व सदस्य हवन में शामिल हुए। पूर्णाहुति के बाद शिव मंदिर प्रांगण में भण्ड़ारा का आयोजन किया गया। जिसमें सभी श्रद्वालूओं ने भण्ड़ारे का प्रसाद ग्रहण किया।
आयोजित 7 दिनी श्रीमद भागवत कथा सफल बनाने में आयोजक समिति के योगेन्द्र मिश्रा, सहक्षेत्र प्रबंधक ड़ीके गुप्ता, ड़ी सिंह, एसके पाण्ड़ेय, पी पटेल, एम पाण्ड़ेय, तुला चंद्र गुप्ता, अजय सिंह, अशोक दुबे, सुनिल विष्वकर्मा, संतोश सिंह, अमृत लाल महतो, विजय ठाकुर, ललन ठाकुर, योगेष्वर ठाकुर, सन्नी सिंह, राकेष यादव, राकी झा, राकेष सिंह, कौषल सिंह, संजीव साहू सहित अन्य सदस्यों एवं पदाधिकारियों का कथा वाचक दीपू महराज के हाथों तिलक लगाकर गुरू चादर भेंट कर सम्मानित किया गया।
