00 स्टीविया ( मीठी तुलसी) की शक्कर गन्ने की शक्कर से 300 गुना मीठी, फिर भी होती है जीरो कैलोरी
00 मां दंतेश्वरी हर्बल समूह और सीएसआईआर ( भारत सरकार ) के बीच हुआ करार
00 आर्गेनिक और औषधिय पौधों की खेती में देश के अग्रणी किसानों का समूह है, ‘ मां दंतेश्वरी हर्बल समूह’
00 हजारों किसानों को मिलेगा लाभ
00 बस्तर क्षेत्र के विकास को मिलेगी गति
00 महाराष्ट्र में भी लगेगा स्टीविया शक्कर संयंत्र
कोंडागांव से सुनील यादव/ पूरी दुनिया में सर्वाधिक मरीज मधुमेह नामक बीमारी से पीड़ित है. मधुमेह के मरीजों के लिए सुगर फ्री एक समय में काफी प्रचलन में था लेकिन स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता और नये शोध ने शक्कर के विकल्प के रूप में स्टीविया सामने आया. विकसित देश में शक्कर या कृत्रिम मिठास के लिए प्रयुक्त किये जाने वाले रसायनों से स्टीविया की ओर उन्मुख हो रहे हैं, लेकिन भारत जैसे विकासशील देशों में अभी स्टीविया के बारे व्यापक जागरुकता नहीं आयी है.
हालांकि भारत में भी इसका प्रयोग धीरे-धीरे बढ़ने लगा है लेकिन स्टीविया के स्वाद में थोड़ी कड़वाहट थी लेकिन सीएसआईआर की आईएचबीटी ने एक ऐसी स्टीविया की प्रजाति विकसित की है जो कड़वाहट रहित है. साथ ही जैविक तरीके से हर्बल खेती और उत्पाद के लिए देश की अग्रणी कंपनी मां दंतेश्वरी हर्बल के साथ एक करार किया है. इस करार के तहत छत्तीसगढ़ में बड़े पैमाने पर इस उन्नत प्रजाति की स्टीविया की खेती मां दंतेश्वरी हर्बल समूह के नेतृत्व में जाएगी तथा इसकी निष्कर्षण इकाई छत्तीसगढ़ के कोंडागांव में स्थापित की जाएगी. बाद में ऐसी इकाई महाराष्ट्र में भी स्थापित की जाएगी.

उल्लेखनीय है कि मां दंतेश्वरी हर्बल देश की पहली आर्गेनिक सर्टिफाइड कंपनी (सन् 1996) है और इसके उत्पाद न केवल देश में बल्कि दुनिया के कई देशों में खासे लोकप्रिय हैं. कंपनी के सीईओ डॉ राजाराम त्रिपाठी ने बताया कि छत्तीसगढ़ के किसानों पर यह करार एक सकारात्मक प्रभाव डालेगा. इससे हजारों एकड़ भूमि पर स्टीविया की खेती की जाएगी और हजारों की संख्या में किसान लाभांवित होंगे. साथ ही एक्सटॉर्सन यूनिट स्थापित होने से भारी संख्या में लोगों को रोजगार मिलेगा. डॉ त्रिपाठी ने बताया कि कोंडागांव जनजातिय बहुल क्षेत्र है और विकास की दौड़ में पिछड़ा क्षेत्र है, लेकिन इस पहल से इस क्षेत्र के विकास को तो गति मिलेगी ही साथ सांस्कृति औऱ समाजिक विकास को भी मजबूती मिलेगी. ज्ञातव्य हो कि कोंडागांव में औषधिय पौधों की खेती डॉ त्रिपाठी द्वारा 800 एकड़ में की जाती है और इससे लगभग 450 आदिवासी परिवारों को रोजगार मिला है.
डॉ त्रिपाठी के अनुसार, गन्ने से निर्मित शक्कर सुक्रोज की तुलना में स्टीविया के स्टीवियासाइड में 300 गुणा ज्यादा मिठास होती है. स्टीवियासाइड कैलोरी रहित व विष रहित मीठा यौगिक है. इससे मोटापा तथा मधुमेह के साथ हृदय रोग के रोकथाम में मदद मिलती है. उन्होंने कहा कि स्टीवियासाइड और रेबाडियोसाइड के निष्कर्षण से जो उत्पाद बनाये जाते हैं वह पूरी तरह से हानिरहित है तथा इसका उपयोग हर्बल चाय और अन्य औषधि निर्माण तथा खाद्य एवं पेय में प्रयोग किया जाता है.
