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HC का बड़ा फैसला: संसदीय सचिवों का पद रहेगा बरकरार, पर मंत्री की तरह नहीं कर सकेंगे काम


00 अब सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे याचिकाकर्ता

बिलासपुर / संसदीय सचिव की निुयक्ति को रद्द करने लगाई गई याचिका को हाईकोर्ट ने शुक्रवार को खारिज कर दिया। हालांकि अब संसदीय सचिव मंत्री की तरह काम नहीं कर पाएंगे। अब तक विधानसभा में मंत्री की अनुपस्थिति में संसदीय सचिव सवालों के जवाब देते थे। अन्य कार्य भी निपटाते थे।

संसदीय सचिव मामले में रमन सरकार को बड़ी राहत मिली है। बिलासपुर हाईकोर्ट ने छत्तीसगढ़ के 11 संसदीय सचिवों की नियुक्ति को सही ठहाराया है। हाईकोर्ट का ये फैसला जहां सरकार के लिए बड़ी राहत है, वहीं विपक्ष को तगड़ा झटका लगा है। याचिकाकर्ता अब इस मामले को सुप्रीम कोर्ट ले जाएंगे।

बता दें कि कांग्रेस नेता मोहम्मद अकबर और आरटीआई एक्टिविस्ट राकेश चौबे ने इस मामले को लेकर हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी। कोर्ट ने 16 मार्च को अंतिम सुनवाई की थी, जबकि 2 फरवरी को कोर्ट ने संबंधित पक्षों की बहस पूरी की थी। इस मामले में हुई सुनवाई में कोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश में संसदीय सचिवों के काम करने पर रोक लगा दी थी। लेकिन मोहम्मद अकबर ने आरटीआई से मिली सूचना के आधार पर बताया है कि सभी संसदीय सचिव और सरकार कोर्ट के आदेश की अवहेलना कर रहे हैं। लिहाजा उन्होंने कोर्ट आॅफ कंटेंप्ट का मामला भी दर्ज कर दिया। बिलासपुर हाईकोर्ट ने अपने फैसले में संसदीय सचिवों की नियुक्ति को सही ठहराया है। हाईकोर्ट की चीफ जस्टिस राधाकृष्णन और जस्टिस शरद गुप्ता की खंडपीठ ने शुक्रवार को फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि संसदीय सचिव बतौर मंत्री कार्य नहीं कर पाएंगे।

ये विधायक हैं संसदीय सचिव –

राजू सिंह क्षत्रीय, तोखन साहू,अंबेश जांगड़े,लखन लाल देवांगन, मोतीलाल चंद्रवंशी, लाभचंद बाफना, रूपकुमारी चौधरी, शिवशंकर पैकरा,सुनीति राठिया,चंपादेवी पावले, गोवर्धन सिंह मांझी

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