रायपुर / रिटायर किये गए कर्मचारियों के मामलो के लिए बनाई गयी कमेटी को कांग्रेस ने भाजपा सरकार की बदनीयती का जीता जागता सबूत बताया है।
कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष शैलेश नितिन त्रिवेदी ने कहा कि भाजपा सरकार ने दुर्भावना पूर्वक वर्ग विशेष के कर्मचारियों को उनका पक्ष सुने बिना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत के खिलाफ एकतरफा जबरिया रिटायर करने का तुगलकी आदेश जारी किया था। दुर्भावना वश रिटायर किये गए अधिकांश कर्मचारी भाजपा सरकार के इस आदेश के खिलाफ न्यायालय की शरण मे गये है। इस बात की पूरी संभावना है कि सरकार के आदेश के खिलाफ कर्मचारियों को अदालत से न्याय मिलने वाला है। चुनावी वर्ष में सरकार को अपनी बदनीयती खुलने के डर से डेमेज कंट्रोल के लिए भाजपा सरकार ने यह कमेटियां बनाई है।
काँग्रेस ने सवाल खड़ा किया कि इन कमेटियों के गठन के लिए सरकार ने जो उद्देश्य बताया है उसी से स्पष्ट हो जाता है कि सरकार ने इन कर्मचारियों को दुर्भावना पूर्वक बदले की भावना से जबरिया रिटायर किया था। रिटायर के आदेश जारी करने के पहले ही इन कर्मचारियों के खिलाफ लगाए गए आरोपो की जांच क्यो नही की गई थी? वर्षो तक सेवा करने के बाद उनके सेवा और आचरण को गुणवत्ता विहीन बता कर रिटायर कर दिया गया इससे इन कर्मचारियों की सामाजिक और परिवारिक और आर्थिक प्रतिष्ठा को ठेस पहुचायी गयी। अब चुनाव को देखते हुए अपने चुनावी हितों को देखते हुए रमन सिंह की सरकार घड़ियाली आंसू बहाने का काम कर रही है।
राज्य में 300 से अधिक ऐसे कर्मचारी है जिनके विरुद्ध गंभीर मामलो में विभागीय जांच चल रही है। आधा दर्जन अधिकारी ऐसे है जिनके खिलाफ अदालत ने टिप्पणी की है जिनमें उनके रसूख के कारण सरकार कोई कार्यवाही नही कर रही। 124 अधिकारियों के खिलाफ सरकार ही अभियोजन की स्वीकृति नही दे रही, वे आज भी सजा से वंचित है। नान घोटाले के आरोपी आईएएस अधिकारियों पर केंद्रीय कार्मिक मंत्रालय की स्वीकृति के बावजूद रमन सरकार ने आज तक कोई कार्यवाही नही किया इसके विपरीत कमजोर और लचर कारणों को आधार बना कर अधिसंख्यक अ.ज. और ज.जा. वर्ग के कर्मचारियों को जबरिया रिटायर कर दिया गया था। कानून सब के लिए बराबर होता है लेकिन भाजपा सरकार के राज में चीन्ह -चीन्ह कर कार्यवाही अनुसूचित जाति और जनजाति के कर्मचारियों के खिलाफ की जाती है।
