अंबिकापुर / मध्यप्रदेश सरकार द्वारा कैबिनेट बैठक संविलियन प्रस्ताव पर मुहर लगते ही सरगुजा में पटाखों की गूंज हर विकासखण्ड में प्रारम्भ हो गई। अंबिकापुर के घड़ी चौक में प्रांतीय सहसँचालक हरेंद्र सिंह व जिला संचालक मनोज वर्मा की अगुवाई में शिक्षाकर्मियों ने जमकर आतिशबाजी की। साथ ही खूब मिठाई बांटा। यह आतिशबाजी केवल जिला मुख्यालय तक ही सिमित नही रहा वरन हर विकासखण्ड में शिक्षाकर्मी घरों से निकल कर अपने पुराने साथियों के ख़ुशी में शरीक हुए।
गौरतलब है कि मध्यप्रदेश सरकार ने अध्यापकों के संविलियन को मंजूरी दे दी है। इससे करीब 2 लाख 37 हजार अध्यापकों को फायदा होगा और उन्हें एक जुलाई 2018 से सातवें वेतनमान का लाभ मिलेगा।

मध्य प्रदेश में शिवराज कैबिनेट के अध्यापकों के संविलियन किए जाने संबंधी निर्णय पर सरगुजा के शिक्षाकर्मियों में खुशी की लहर है। उन्हें उम्मीद है कि अब छत्तीसगढ़ सरकार भी ऐसा ही निर्णय यहां लेगी। शिक्षाकर्मी मोर्चा के प्रदेश सहसंचालक हरेंद्र सिंह ने कहा है कि शिक्षाकर्मी भर्ती प्रक्रिया की शुरुआत तत्कालीन मध्यप्रदेश से ही शुरू हुई थी और मध्यप्रदेश के शिक्षाकर्मी भी हमारे ही परिवार के सदस्य और भाई बंधु हैं। आज उनके राज्य में उनके स्वर्णिम भविष्य के लिए फैसला लिया गया है तो यह हमारे लिए भी खुशी की बात है।

हरेंद्र सिंह ने कहा कि आज हमारे मध्यप्रदेश के साथियों को जीत हासिल हुई है और इसकी खुशी यहां के शिक्षाकर्मी भी मनाएंगे। साथ ही अब यहां भी प्रदेश सरकार को मातृ राज्य से सीख लेते हुए पूर्व में किए गए गलतियों को सुधारते हुए वेतन विसंगति को दूर करते हुए क्रमोन्नत और सातवें वेतनमान के साथ प्रदेश के 1 लाख 80 हजार शिक्षाकर्मियों का मूल शिक्षा विभाग में संविलियन करना चाहिए और इसकी लड़ाई मोर्चा और तेज करेगा।
सरगुजा जिला संचालक मनोज वर्मा का कहा कि मध्यप्रदेश में दिग्विजय सिंह की सरकार ने नियमित शिक्षकों के पद को मृत घोषित (ड्राइंग केडर) किये थे शिवराज सरकार ने उन पदों को पुनः जीवित कर संविलियन का रास्ता बनाया जबकि लगातार बाइस सालों से यह बात सरकार के प्रतिनिधियों द्वारा यह कहा जा रहा था कि संविलियन में तकनीकी दिक्कत है शिवराज सरकार के इस फैसले से अब इस पर विराम लग गया। मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के शिक्षाकर्मी विगत 22 वर्षों से अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे हैं और अविभाजित मध्य प्रदेश से ही इस परंपरा की शुरुआत हुई थी और वहीं से इसके खात्मे की भी शुरुआत हुई है निश्चित तौर पर यह शुभ संकेत है। आज मध्यप्रदेश के साथियों की ख़ुशी पुरे जिले में मिठाई बांटकर और पटाखे फोड़ कर अपने मध्यप्रदेश के शिक्षाकर्मी भाई-बहनों की खुशी में शामिल हो रहे हैं। छत्तीसगढ़ में भी संविलियन की लड़ाई निर्णायक मोड़ पर है और यहां के शासन को भी शिक्षाकर्मियों का संविलियन करना ही होगा ।
मनोज वर्मा ने बताया कि सरगुजा जिले के सभी विकासखण्डों में शिक्षाकर्मियों ने पटाखा फोड़ कर मिठाई बांटी है। सीतापुर में शुशील मिश्रा, रामबिहारी गुप्ता, रोहिताश शर्मा लखनपुर में राकेश पांडे, संजय चौबे उदयपुर में लखन राजवाड़े, सुरित राजवाड़े, लुंड्रा में रणबीर सिंह चौहान, बतौली में जवाहर खलखो, लव गुप्ता, मैनपाट में देवेंद्र पाडेय कमलेश सिंह अम्बिकापुर के घड़ी चौक में हरेंद्र सिंह व मनोज वर्मा की अगुवाई में शिक्षाकर्मियों ने पटाखा फोड़ मिठाई बांटी है।इस दौरान घड़ी चौक में अमित सिंह, राकेश दुबे, प्रदीप राय, काजेश घोष, पवन सिंह, नाजिम खान, जवाहर खलखो, मुकेश मुदलियार, अरविन्द सिंह, विक्रम श्रीवास्तव ,संजय अम्बष्ट,करण सिंह जोगी, अजय लकड़ा, चन्ददेव चक्रधारी, अरविन्द तिवारी,राजेश सिंह, अजय मिश्रा सहित अन्य शिक्षाकर्मी उपस्थित रहे।
