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लिपिकों का आंदोलन आठवें दिन भी जारी, काली पट्टी लगाकर कर रहे विरोध

बलरामपुर/ छत्तीसगढ़ प्रदेश लिपिक वर्गीय शासकीय कर्मचारी संघ के आह्वान पर राज्य भर के लिपिक 1 जून से काली पट्टी लगाकर कार्य कर रहे हैं। जिले के समस्त कार्यालयों में काली पट्टी लगाकर लिपिक सरकार के वादाखिलाफी का संवैधानिक तरीके से विरोध कर रहे हैं।

बलरामपुर जिलाध्यक्ष रमेश तिवारी ने बताया कि ये लिपिकों के हक़ और अस्मिता की लड़ाई है। हम अपनी जायज़ माँगो के लिये सरकार से पहले भी ज्ञापन सौंपकर याचना कर चुके हैं, परन्तु किसी प्रकार की सुनवाई न होने पर बाध्य होकर अब आन्दोलन प्रारम्भ करना पड़ रहा हैं। सरकार ने लिपिकों की मांगों का सदैव निरादर किया है, वेतन विसंगति 37 वर्षों से है, जिसको दूर करने हेतु कई बार आन्दोलन हुये, परन्तु सरकार ने सदैव लिपिकों से छल ही किया। सरकार के कर्मचारी विरोधी रवैया से प्रत्येक कर्मचारी व्यथित है, अब विवश होकर हमे आर पार की लड़ाई लड़ना पड़ रहा है।
हमारी माँग जायज़ है, राजस्थान में भी भाजपा की सरकार ने लिपिकों को चार स्तरीय पदोन्नत वेतनमान दिया है, हम उसी के अनुरूप वेतनमान की माँग कर रहे हैं । सरकार को चाहिये कि हमारी माँग पर गंभीरता से विचार करे, और विसंगति का निराकरण करके अपने संवेदनशीलता का परिचय दे।

उल्लेखनीय है कि भाजपा के चुनावी घोषणा पत्र 2013 में कर्मचारियों के वेतन विसंगति दूर करने का वादा किया गया था, परन्तु सरकार ने पांच वर्ष व्यतीत हो जाने पर भी अपना वादा नही निभाया। अब दुबारा चुनाव का वक़्त आ गया, ऐसे में जबकि सरकार ने पिछले वादे को ही नही निभाया है, तो अब उन पर दुबारा भरोसा कैसे किया जायेगा ?

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