रायपुर/ ग्राम गुमा निवासी चंद्रकुमार निर्मलकर पिता पुनीत निर्मलकर के लिये सौभाग्य योजना उसके लिये दुर्भाग्य योजना बनी। यह छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी के अधिकारियों की घोर लापरवाही को दर्शाता है, यह आरोप लगाते हुये प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता एम.ए. इकबाल ने विद्युत कंपनी की सौभाग्य योजना के अंतर्गत नये कनेक्शन देने के टारगेट को पूरा करने के कारण अनाप-शनाप कार्य किये जाने के कारण यह घटना हुई।
विगत दिनों उत्तर संभाग के टाटीबंद जोन के अंतर्गत की यह घटना है जिसमें मृतक चंद्रकुमार निर्मलकर के घर सौभाग्य योजना के अंतर्गत विद्युत कनेक्शन दिया गया था, जिसमें यह आरोप भी है कि कनेक्शन के समय लगाये गये मीटर में पहले से 2282 यूनिट खपत दिखाई जा रही थी और मीटर लगने के एक माह के बाद उस उपभोक्ता के घर 12 हजार रू. का बिल भेज दिया गया, जिससे परेशान होकर मृतक चंद्रकुमार ने टाटीबंद बिजली ऑफिस के चक्कर बिजली बिल कम करने के लिये लगाये जिसके फलस्वरूप बिजली विभाग द्वारा बिजली बिल में मात्र 3 हजार रू. कम किया था। इसके बाद भी 9 हजार रू. का बिल उसको पटाने दिया गया था, जिसे वो पटाने में असमर्थ था और आर मानसिक रूप से परेशान रहता था, यह सारी बाते कोटा के सामने रेल्वे लाईन पर सुसाईड के बाद उसके पास से सुसाईडल पत्र मिलने पर सरस्वती नगर थाना के पुलिसकर्मियों को जांच के दौरान जानकारी मिली। विद्युत विभाग के अधिकारी सरकार को खुश करने के लिये सौभाग्य योजना के अंतर्गत उनको दिया गया टारगेट को पूरा करने के लिये जल्दबाजी में गलत काम को अंजाम दे रहे है, जिसका खामियाजा गरीब उपभोक्ता के परिवार वालों को उठाना पड़ता है।
उत्तर संभाग पिछले कई वर्षो से उपभोक्ताओं की शिकायत और उस ऑफिस के गलत कार्यो के कारण हमेशा सुर्खियों पर बना रहता है। इसके पहले इसी तरह उसी संभाग के कुछ ठेका कर्मचारियों द्वारा उपभोक्ताओं से बिजली बिल की राशि उनके घरों से जाकर वसूल कर फर्जी रसीद देकर करोड़ों रू. का घोटाला करने का खबर सामने आई थी। फिर भी उत्तर संभाग के कामकाज में कोई विशेष सुधार नहीं आया और न ही अधिकारियों ने इसके बारे में गंभीरता से विचार कर कार्यवाही की। इसी का नतीजा है कि चंद्रकुमार निर्मलकर जैसे गरीब किसान अत्यधिक बिजली बिल आ जाने के कारण खुदकुशी का प्रकरण सामने आया। जिसकी जांच की मांग कांग्रेस करती है।
