रायपुर / धान के समर्थन मूल्य में मात्र 200 रू. प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी कर भाजपा ने एक बार फिर किसानों से वादा खिलाफी किया है।
प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता सुशील आनंद शुक्ला ने कहा है कि भारतीय जनता पार्टी ने अपने 2013 के चुनावी घोषणा पत्र में धान का समर्थन मूल्य 2100 रू. प्रति क्विंटल करने और 300 रू. प्रति क्विंटल बोनस देने का वायदा किया था। इस वायदे के अनुसार धान की कुल कीमत 2400 रू. प्रति क्विंटल दिया जाना चाहिये। आधा-अधूरा वायदा पूरा कर झूठी वाहवाही बटोरने की भारतीय जनता पार्टी की फितरत बन चुकी है। धान का बोनस भी आधे ही किसानों को दिया गया। अब जब चुनावी भय से समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी की घोषणा की गयी है, तो वह भी अधूरा ही दिया गया है। भाजपा और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कृषि उत्पादों की लागत में पचास फीसदी मुनाफा जोड़कर समर्थन मूल्य देने का वायदा किया था, लेकिन जब समर्थन मूल्य देने की बात आई तो कृषि लागत एवं मूल्य आयोग की पुरानी 2017 की सिफारिशों को आधार बना कर समर्थन मूल्य की घोषणा कर दिया गया। 2017 की सिफारिश के आधार पर धान की लागत 1166 रू. प्रति क्विंटल है, लेकिन 2018 में बढ़ी महंगाई डीजल और कृषि यंत्रों तथा खाद बीज के बढ़े दामों के आधार पर गणना की जाये तो धान का मूल्य 1400 रू. से भी अधिक हो जायेगा। कृषि लागत एवं मूल्य आयोग ने भी अपनी 2018 की सिफारिशों में धान का लागत मूल्य 2017 की तुलना में बढ़ा कर रिपोर्ट दिया है। 1400 रू. प्रति क्विंटल के लागत के हिसाब से धान का समर्थन मूल्य 2100 रू. से अधिक होना चाहिये। जिसका वायदा भाजपा ने अपने 2013 के घोषणा पत्र में भी किया था। समर्थन मूल्य में मात्र 200 रू. बढ़ोतरी की यह घोषणा पिछले 2 साल से सूखे की मार झेल रहे छत्तीसगढ़ के किसानों के जले पर नमक छिड़कने के जैसा है। पहले तो सूखा राहत मुआवजा फसल बीमा मुआवजा में धोखा दिया। अब चुनावी वर्ष में समर्थन मूल्य और बोनस की एक आशा जगी थी उसे भी भाजपा ने आधी-अधूरी घोषणा कर अपने वायदा खिलाफी के पुराने चरित्र को फिर से उजागर कर दिया।
