कोरिया / सरकार अपने तीसरे पारी में विकास की बातें कहते नही थकती और इन्ही बातों के विपरीत प्रदेश के कन्या आश्रम में पढ़ाई नहीं जूठे धो रही हैं बच्चियां ।
जी हां….छत्तीसगढ़ कोरिया जिले के पहाड़ पारा स्थित प्राथमिक कन्या शाला आश्रम में पढ़ाई की जगह आश्रम में झाड़ू लगाना, आश्रम के कूड़ा-कचड़ा उठाना, अन्य छात्राओं को भोजन देना व अपने सहित आश्रम के जूठे बर्तन धो रही है बच्चियां।

स्कूल जा पढ़े बर, जिंदगी ला गढ़े बर, कुछ ऐसे ही लुभावने स्लोगन का प्रचार-प्रसार कर सरकार शिक्षा के गुणात्मक विकास का दावा करती है। मैदानी स्तर पर इसकी सच्चाई के दावे वाकई शर्मनाक है।
सरकार, स्कूलों में मध्यान्य भोजन दे रही है। ताकि गरीब के बच्चे भी स्कूल में पढ़ाई पर ध्यान दें। भोजन पकाने तमाम सुविधाएं देने की भी बात की जा रही है, लेकिन स्कूल में बच्चों को भोजन देने के बाद उन्हें जूठे बर्तन धुलवाएं जा रहे हैं। यह सब हो रहा है कोरिया जिले की पहाड़ पारा स्थित प्राथमिक कन्या शाला आश्रम में।

बता दे कि इस आश्रम में 1 सहायिका, 3 भृत्य व 1 जमादार नियुक्त है जो आश्रम में रोजाना कार्य करने जैसे – भोजन बनाने से लेकर साफ – सफाई की व्यवस्था देख रेख हेतु सरकार से वेतन पाते है। इन सब के होने वावजुद आखिर बच्चियों से ऐसा शर्मनाक कार्य कराने की जरूरत क्या है।

यही नही चूँकि यह कन्या आश्रम है तो इस आश्रम में पुरुषों की आनेजाने में भी मनाही है वावजुद इसके पुरुषों का आना जाना भी लगातार बना रहता है।
ऐसे में अब सवाल यह उठता है कि आखिर कब तक रमन राज्य में ये सब होता रहेगा। क्या आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में अभिवाहक अपने बच्चीयों को आश्रम में इसलिए भेजते है कि उन्हें उनके बच्चों को मजदूरी करने की तालीम दी जाए।

