वसीम बारी – रामानुजगंज / विशेष न्यायाधीश अशोक कुमार लुनिया ने महिला के साथ बलात्कार करने में आरोपी को 25 जुलाई, 2018 को सुनवाई के दौरान दोष सिद्ध पाते हुए सात वर्ष की कठोर कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही 500 रूपये के अर्थदण्ड लगाते हुए जेल भेज दिया।
अभियोजन के अनुसार पीड़िता ग्राम भेलवाडीह निवासी एवं वादी मुकदमा ने संबंधित आरक्षी केन्द्र में मौखिक सूचना दी। आरोप लगाया कि पीड़िता के सहमति बिना एवं उसकी इच्छा के विरुद्ध बलात्संग कारित किया। घटना दिनांक 31 जनवरी, 2017 को ग्राम भेलवाडीह में अभियुक्त ने पीड़िता के साथ ज़बरन दुराचार किया। 31- 01- 2017 को रात्रि लगभग 8 बजे पीड़िता अपनी बेटी बिंदु के साथ अपने घर पर थी। उसी समय अभियुक्त उनके घर पर आया था। पूर्व से परिचित होने के कारण पीड़िता ने अभियुक्त को घर में बैठाया, उसी समय उसकी बेटी बिंदु मैदान हेतु बाहर चली गई। तब अभियुक्त ने पीड़िता को जमीन पर पटक दिया था। उसने अभियुक्त को बार-बार मना करने के बाद भी एक नहीं सुना और अभियुक्त ने पीड़िता के साथ ज़बरन बलात्कार कारित किया। चीख पुकार की आवाज़ को सुन कर उसकी बेटी बिंदु घटना स्थल पर पहुंच कर बीच बचाव की परंतु तब तक बहुत देर हो चुका था। हो हल्ला के कारण पकड़े जाने के डर से अभियुक्त मौके से फरार होने में सफल रहा। घटना उपरांत उसने घटना का वृत्तांत अपना पति, साक्षी समीर देव एवं श्याम पति को बताई। जिसके बाद तहरीर पर पुलिस ने आरोपी रामप्रवेश उर्फ़ प्रवेश पिता गणेश सिंह मार, उम्र 45 वर्ष, ग्राम जमुआं टांड़ , आरक्षी केन्द्र बलरामपुर के विरुद्ध धारा 376, एवं अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 3 (2-V) के अन्तर्गत मुकदमा दर्ज करते हुए पीड़िता का बयान न्यायालय में दर्ज कराने के साथ उसका मेडिकल कराकर आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया। संस्थित दिनांक 02 – 05 – 2017, विशेष सत्र क्रमांक 29/2018, उक्त प्रकरण में दिनांक 25 जुलाई को विशेष न्यायाधीश अशोक कुमार लुनिया की अदालत में सुनवाई हुई। अभियोजन की तरफ से एपीपी अशोक गुप्ता ने गवाह प्रस्तुत किये और पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्य एवं गवाहों के बयान के आधार पर आरोपी रामप्रवेश को दोष सिद्ध करते हुए कड़ी से कड़ी सजा सुनाए जाने की अपील की। जिसपर अभियुक्त की ओर से पैरवी कर रहे विद्वान अधिवक्ता आर के पटेल ने अदालत से निवेदन भरे स्वर में कहा कि अभियुक्त का प्रथम अपराध है, इसलिए अभियुक्त को न्युनतम दण्ड से दण्डित किया जाना चाहिए। प्रकरण का अवलोकन करते हुए तथा अधिवक्ताओं की दलील, पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्य एवं गवाहों के बयान सहित समस्त विषयों पर विचार उपरांत अदालत ने अभियुक्त को अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 3 (2-V) से दोषमुक्त करते हुए भा द वि की धारा 376 के तहत दोष सिद्ध पाते हुए अभियुक्त रामप्रवेश को सात वर्ष की कठोर कारावास एवं 500 रूपये अर्थदण्ड से दण्डित किया गया। अर्थदण्ड की अदायगी का व्यतिक्रम पर अभियुक्त को 07 दिन का कठोर कारावास पृथक से भुगताये जाने का दण्डादेश जारी किया गया है।
