कोरिया / आसन्न विधानसभा चुनाव के मद्देनजर अब कांग्रेस की तैयारी तेज हो गई है। इस बार कोरिया जिले के सबसे महत्वपूर्ण और सामान्य सीट बैकुंठपुर से कांग्रेस में जबरजस्त खींचतान देखने को मिल रही है। कांग्रेस में टिकट की घोषणा अब शीघ्र ही होने वाली है ऐसे में विधायक पद के दावेदारो के समर्थक अब सोशल मीडिया में खुलकर सामने आ गए हैं।

इस बार बैकुंठपुर सीट से पूर्व वित्तमंत्री स्व.डॉ.रामचंद्र सिंहदेव की भतीजी अम्बिका सिंहदेव की दावेदारी के बाद में बड़ा ही रोमांच पैदा कर दिया है। बताया जाता है कि प्रदेश कांग्रेस के प्रमुख नेताओं द्वारा उन्हें हरी झंडी भी दे दी गई है। जिसके बाद क्षेत्र में उनकी सक्रियता तेजी से बढ़ गई है।

17 लोगो ने की थी दावेदारी -कांग्रेस में इस बार टिकट हेतु नया फार्मूला तय किया गया था। जिसके अनुसार टिकट की चाह रखने वाले नेताओं को ब्लॉक अध्यक्ष के पास अपना आवेदन देना था। इस प्रक्रिया में बैकुंठपुर सीट से 17 लोगो ने आवेदन किया। उनमे से अनेक लोगो ने अम्बिका सिंहदेव के नाम पर सहमति देते हुए अपनी दावेदारी वापिस ले ली। हालांकि पूर्व में प्रत्याशी रहे वेदांती तिवारी अभी मैदान से हटे नही हैं और उनकी दावेदारी मजबूत बनी हुई है।
सोशल मीडिया में समर्थक दिखा रहे सक्रियता और टिकट भी कर दी है फाईनल – बीते कुछ दिनों से कांग्रेस में अलग – अलग गुटो की लड़ाई भी सामने देखने को मिल रही है। अब तो यहां तक हो गया है कि समर्थक खुलकर अपने नेता का टिकट फाइनल होने का दावा कर रहे हैं। यहां से टिकट के लिए मुख्य लड़ाई वर्तमान में वेदांती तिवारी व अम्बिका सिंह देव के बीच ही दिखाई दे रही है। ऐसे में समर्थक भी कहीं से पीछे नही हैं। दोनो के समर्थकों के बीच सोशल मीडिया में बहस भी चल रही है। आरोप प्रत्यारोप के बीच समर्थक एक दूसरे दावेदार को कमजोर उम्मीदवार बता रहे हैं। कुछ समर्थक तो अम्बिका सिंहदेव को टिकट मिलने पर कांग्रेस की हार निश्चित होने का दावा भी खुल कर कर रहे हैं।

कांग्रेस अध्यक्ष के पैराशूट वाले बयान पर छिड़ी बहस – पिछले दिनों छत्तीसगढ़ प्रवास पर आए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने खुलकर यह बयान दिया था कि किसी भी पैराशूट प्रत्याशी को मैदान में नही उतारा जाएगा। इस बयान के बाद से ही बैकुंठपुर सीट में गजब की जंग छिड़ी हुई है। एक ओर कांग्रेस में वेदांती समर्थक जहां अम्बिका सिंहदेव को पैरशूट प्रत्याशी बता रहे हैं तो वहीं अम्बिका सिंहदेव समर्थक उनके पूर्वजों का हवाला देकर पैराशूट को दबाने का प्रयास कर रहे हैं।

बहरहाल कांग्रेस अब स्पष्ट रूप से यहां गुटो में बटी नजर आ रही है। समर्थको के बहस पर यदि गौर किया जाए तो लगता है कि किसी भी दावेदार का टिकट फाइनल होने के बाद दूसरे दावेदार के समर्थक शायद ही पार्टी प्रत्याशी का साथ दें और यदि यही स्थिति बनी रही तो फिर भाजपा की राह और आसान हो जाएगी। हालाकि भाजपा के लिए भी अभी दिल्ली दूर है के बराबर है।
