रायपुर / छत्तीसगढ़ में फर्जी आदिवासी करार दिए जाने के मामले में राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री अजित जोगी को सुप्रीम कोर्ट से भी राहत मिली है. उच्चतम न्यायालय ने हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखा है.
अजीत जोगी की जाति मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी है. संतकुमार नेताम ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई थी. संतकुमार की याचिका को कोर्ट ने खारिज कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने बिलासपुर हाईकोर्ट के आदेश को ही बरकरार रखा है.
दरअसल छत्तीसगढ़ सरकार की एक उच्च स्तरीय कमेटी ने अजित जोगी को आदिवासी मानने से इंकार कर दिया था. इस कमेटी ने उनका आदिवासी समुदाय का जाति प्रमाण पत्र भी निरस्त कर दिया था. इसके बाद राजनीतिक गलियारों में जोगी को फर्जी आदिवासी करार देकर हमले हुए थे.
जोगी ने मामले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी. उन्होंने अपनी याचिका में कहा था कि सुप्रीम कोर्ट ने उनकी जाति की निर्धारण के लिए राज्य की उच्च स्तरीय कमेटी को मामला सौंपा था. राज्य सरकार ने एक सदस्य वाली उच्च स्तरीय कमेटी को उनकी जाति का निर्धारण करने का दायित्व सौंप दिया. उनके मुताबिक मामले की जांच कमेटी बनाकर की जानी थी. उन्होंने आरोप लगाया था कि राज्य की एक सीनियर IAS अधिकारी, जो कि इस कमेटी की एक मात्र चेयरमैन है. उन्होंने द्वेष करके उनके खिलाफ फैसला दिया. हाईकोर्ट ने तकनीकी आधार पर जोगी की याचिका को स्वीकार किया और राज्य सरकार को नए सिरे से हाई पॉवर कमेटी गठित कर जोगी की जाति के छानबीन के निर्देश दिए.
