कोरिया / आखिरकार ओड़गी नाका स्थित कॉलेज के खेल मैदान के लिए सुरक्षित वह जमीन बिल्डर के नाम पर हो ही गई। जिसे कुछ वर्षों पूर्व स्थानीय विधायक श्रीमती अम्बिका सिंहदेव के काका साहब और प्रदेश के पूर्व वित्तमंत्री स्व.डॉ.रामचंद्र सिंहदेव के हस्तक्षेप के बाद खेल मैदान के लिए आरक्षित किया गया था।
इस संबंध में राजस्व न्यायालय से बिल्डर के पक्ष में आदेश पारित होने के बाद स्थानीय स्तर पर हड़कंप मचा हुआ है तो वहीं छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने कलेक्टर को ज्ञापन सौपकर जमीन वापस कराने की मांग करते हुए उग्र प्रदर्शन की चेतावनी दी है।
ज्ञात हो कि यह वही शासकीय जमीन है जिसे स्थनीय बिल्डर संजय अग्रवाल द्वारा कूटरचित दस्तावेज के माध्यम से अपने निजी भूमि के बदले में लिया गया है, करोड़ो की जमीन का कीमत लाख में बताकर शासन को चुना लगाया गया है, जबकि दस्तावेज में नगरपालिका का जो अनापत्ति प्रमाण पत्र लगाया गया है वह भी फर्जी है। पिछले वर्ष यह मामला सामने आने के बाद नागरिक संघर्ष समिति के बैनर तले पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष शैलेश शिवहरे समेत संजय जायसवाल, सुभाष साहू, भानू पाल, विपिन जायसवाल समेत नगर के अनेक व्यापारियों, नेताओं और आमजनों ने प्रदर्शन किया था। जिसके बाद बिल्डर ने स्वयं प्रशासन को पत्र देकर जमीन अदला बदली का प्रकरण निरस्त करने का निवेदन किया था। प्रशासन ने भी बिल्डर के पत्र का हवाला देकर प्रदर्शन समाप्त करा दिया था। लेकिन यह मामला यही शांत नही हुआ। इस मामले मे बिल्डर ने चालाकी करते हुए राजस्व न्यायालय में याचिका दाखिल किया, जिसके बाद यह जमीन उसके नाम हो गई।
एक बार फिर करोड़ो की जमीन बिल्डर के नाम होने की खबर पर स्थानीय जनों में हड़कंप मचा हुआ है तो वहीं छात्र संगठन ने कलेक्टर को ज्ञापन सौपकर कहा है कि जिले में एकमात्र कन्या महाविद्यालय स्थित है जो विगत कई वर्षों से संचालित है। यहां दूरस्थ ग्रामीण अंचल की छात्राएं अध्ययन कर रही हैं उनके सर्वांगीण विकास हेतु खेल मैदान यूजीसी के मापदंड के अनुसार जरूरी है। आज तक उन्हें खेल मैदान उपलब्ध नही कराया गया है, लेकिन महाविद्यालय के सामने खाली पड़ी भूमि खसरा नम्बर 285 व 286 को समतलीकरण व बाउंड्रीवाल फेंसिंग तार द्वारा कराया गया तथा उच्चाधिकारियों के द्वारा उक्त जमीन को मौखिक रूप से महाविद्यालय को सौप दिया गया था, लेकिन यह जमीन अब बिल्डर के नाम होने की सूचना समाचार पत्र के माध्यम से मिल रही है। विद्यार्थी परिषद ने ज्ञापन में कहा है कि यह महाविद्यालय की छात्राओं के लिए यह घोर संकट का विषय है तथा उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ होना तय है। यह मैदान महाविद्यालय को खेल मैदान के रूप में पुनः प्रदान करने की आवश्यकता है।
छात्र संगठन ने कलेक्टर को दिए ज्ञापन में 15 दिवस का समय दिया है और मांग पूरी न होने पर चरणबद्ध आंदोलन एवं प्रदर्शन की चेतावनी दी है।
उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय राजमार्ग के बगल में स्थित करोड़ो की जमीन में पूर्व मे लोक निर्माण विभाग का विश्राम भवन भी बनाया जाना था लेकिन पूर्व वित्तमंत्री स्व.डॉ रामचंद्र सिंहदेव की आपत्ति के बाद विश्राम भवन नही बन सका उनका कहना था कि यह जमीन कॉलेज के छात्रों के लिए खेल मैदान के रूप में उपयोग होगी।
बहरहाल इस मामले में अब प्रशासन के अगले कदम का इंतजार है और देखना यह भी है कि जिस जमीन को पूर्व वित्तमंत्री के हस्तक्षेप के बाद खेल मैदान के लिए छोड़ा गया था उसे पुनः वापिस कराने में स्थानीय विधायक और कांग्रेस नेताओं की भी क्या भूमिका रहती है।

