नयी दिल्ली / लोकसभा चुनाव में लगातार दूसरी बार ‘ प्रचंड मोदी लहर’ पर सवार भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) रिकॉर्ड सीटों के साथ फिर से केंद्र की सत्ता पर काबिज होने जा रही है। निर्वाचन आयोग की ओर से बृहस्पतिवार को जारी मतगणना की ताजा जानकारी के अनुसार भाजपा ने जहां एक सीट अपनी झोली में डाल ली है, वहीं 350 सीटों पर आगे चल रही है। उधर, कांग्रेस 88 सीटों पर आगे है। आयोग ने 542 सीटों के रुझान/परिणाम जारी किये हैं।
मिशन-2019 में मिली ऐतिहासिक जीत ने विपक्षी दलों और आलोचकों की नींद तो उड़ा ही दी लेकिन समर्थकों को भी ये सोचने पर मजबूर कर दिया की आखिर क्या थी मोदी लहर. क्या ये बालाकोट एयर स्ट्राइक का असर था या फिर ध्रुवीकरण के कारण जीत मिली या फिर कारण कुछ और थे जिन्होंने उनके बाकी नेताओं से अलग पहचान दी. यहां सौ बात की एक बात थी मोदी की आउट ऑफ बॉक्स थींकिंग. एक ऐसी सोच जिसमें परंपरगत या पुरानी लीक से अलग हट कर कुछ कर गुजरने का जज्बा था और अपने फैसलों पर भरोसा जिसने असंभव दिखते मिशन 2019 की जीत को आसान सा बना दिया.
ये चुनाव 68 वर्षीय मोदी को दशक के सबसे लोकप्रिय नेता के तौर पर स्थापित कर रहे हैं, निर्वाचन आयोग द्वारा जारी मतगणना के आंकड़े दिखाते हैं कि भाजपा अपने 2014 के प्रदर्शन से भी बेहतर करने जा रही है। अगर मौजूदा रुझान अंतिम परिणामों में परिवर्तित हुए तो भाजपा 2014 के अपने प्रदर्शन में सुधार कर ज्यादा सीटें जीतती दिख रही है। 2014 में भाजपा ने लोकसभा की 543 सीटों में से 282 सीटें जीती थीं जबकि इस बार वह अपने दम पर 300 सीटों के करीब पहुंचती दिख रही है। भाजपा नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) 2014 की 336 सीटों के मुकाबले 344 सीटों पर काबिज होता दिख रहा है। मतगणना के रुझानों के आधार पर चुनाव परिणामों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता, उनकी सरकार के पिछले पांच साल के कार्यों और चुनाव प्रचार अभियान का नतीजा माना जा रहा है। चुनाव प्रचार राष्ट्रीय सुरक्षा, राष्ट्रवाद और हिंदुत्व के इर्द-गिर्द रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लगातार कांग्रेस पार्टी पर वंशवादी राजनीति को लेकर निशाना साधा। विपक्ष ने भाजपा पर ध्रुवीकरण और बांटने वाली राजनीति के आरोप लगाते हुए हमला बोला। मतगणना के रुझानों के अनुसार, मोदी लहर के साथ-साथ पार्टी अध्यक्ष अमित शाह की चुनावी रणनीति ने भौगोलिक और जातीय, उम्र, लिंग जैसे समीकरणों को मात देते हुए विपक्ष का सफाया किया है।
गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, ‘ आम चुनावों में यह ऐतिहासिक जीत मोदीजी के दूरदर्शी नेतृत्व, अमित शाहजी के जोश और जमीनी स्तर पर लाखों भाजपा कार्यकर्ताओं के कठिन परिश्रम का नतीजा है।’
चुनाव रुझानों का बाजार ने भी स्वागत किया है। बीएसई के सेंसेक्स ने पहली बार 40 हजार की ऊंचाई को छुआ, वहीं एनएसई के निफ्टी ने 12 हजार के स्तर को पार किया। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया भी 14 पैसे मजबूत होकर 69.51 पैसे पर रहा।
विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने ट्वीट कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बधाई दी। सुषमा ने ट्वीट किया, ‘‘ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी – भारतीय जनता पार्टी को इतनी बड़ी विजय दिलाने के लिए आपका बहुत बहुत अभिनन्दन । मैं देशवासियों के प्रति हृदय से कृतज्ञता व्यक्त करती हूँ । ’’
वहीं, कांग्रेस महासचिव और पूर्वी उत्तर प्रदेश की प्रभारी प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी को जीत की बधाई. हम जनता के फैसले का सम्मान करते हैं.
भाजपा के वयोवृद्ध नेता लालकृष्ण आडवाणी ने पीएम नरेंद्र मोदी को प्रचंड बहुमत मिलने की बधाई दी. उन्होंने कहा, बीजेपी की अभूतपूर्व जीत के लिए नरेंद्र मोदी को बधाई. अमित शाह और बीजेपी कार्यकर्ताओं ने बीजेपी की जीत के लिए अथक परिश्रम किया.
प्रचंड बहुमत मिलने पर पीएम मोदी ने देश की जनता के नाम ट्वीट किया. उन्होंने लिखा ‘सबका साथ + सबका विकास + सबका विश्वास = विजयी भारत. हम एक साथ बढ़ते हैं, साथ मिलकर हम समृद्ध होते हैं, एक साथ हम एक मजबूत और समावेशी भारत का निर्माण करेंगे. भारत फिर से जीता# विजयीभारत’.
भाजपा की जीत के 10 बड़े कारण –
1. राष्ट्रवाद के कारण मिली जीत
लोकसभा चुनाव के पहले यह माना जा रहा था कि विपक्ष बेरोजगारी, महंगाई और राफेल के सवाल को लेकर भाजपा को दबोच लेगी। ऐसा लगने भी लगा था जब पिछले साल कांग्रेस को मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान और कर्नाटक आदि राज्यों में सफलता मिली थी। लेकिन चुनाव के ठीक पहले नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रवाद का ऐसा डंका बजाया कि सारे मुद्दे हवा हो गए।
2. विकल्प का अभाव
इस बार के चुनाव में लोगों में नरेंद्र मोदी सरकार से नाराजगी थी। इस एंटी इनकंबेंसी फैक्टर से नरेंद्र मोदी और उनके मुख्य सिपाहसलार अमित शाह भी वाकिफ थे। इसके बावजूद प्रारंभ से ही वे जीत के प्रति आशावन थे। इसकी बड़ी वजह यह रही कि विपक्ष के पास नेता का अभाव था। विपक्ष कोई एक चेहरा प्रस्तुत नहीं कर सका। अपने चुनावी रैलियों में नरेंद्र मोदी ने यह कहकर जनता को प्रभावित किया कि यदि यूपीए को जीत मिली तो देश को हर सप्ताह नया पीएम मिलेगा।
3. नरेंद्र मोदी-अमित शाह की जोड़ी
भाजपा की लगातार दूसरी जीत में सबसे अहम भूमिका नरेंद्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी की है। इन दोनों नेताओं ने चाहे भले ही भाजपा पर अपना कब्जा बना लिया हो, लेकिन व्यूह रचना में उनका कोई सानी नहीं है, यह साबित भी कर दिया है। सात चरणों में हुए मतदान के क्रम में इन दोनों नेताओं ने चरण दर चरण रणनीतियां बनायी और उन्हें नेता के बजाय प्रोफेशनल की तरह अंजाम दिया।
4. ‘मैं भी चौकीदार’ ने दिखाया रंग
भाजपा के लिए खास बात यह रही कि विपक्ष राष्ट्रीय स्तर पर नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ कोई एजेंडा तय करने में पूरी तरह विफल रहा। एक राफेल को लेकर राहुल गांधी ने ‘चौकीदार ही चोर है’ का उपयोग कर हमला किया। लेकिन जब नरेंद्र मोदी ने ‘मैं भी चौकीदार’ कहकर हमला किया तब राहुल के नारे हवा में उड़ गए। रही सही कसर सुप्रीम कोर्ट ने उतार दी जब राहुल गांधी को इस मामले में माफी मांगने को कहा गया।
5. पहले से ही बिखरा था विपक्षी खेमा
भाजपा को मिली इस जीत में जितनी भूमिका नरेंद्र मोदी और अमित शाह की थी, विपक्ष की भूमिका भी कुछ कम नहीं थी। एक ओर एनडीए खेमे के सभी घटक दल एकजुट नजर आए तो विपक्षी खेमे में सभी अलग-अलग थे। कांग्रेस तो अधिकांश राज्यों में जूनियर पार्टी के रूप में रही। क्षेत्रीय दलों के साथ तालमेल व सामंजस्य के अभाव में बिखरा विपक्ष जनता के समक्ष कोई विकल्प देने में सक्षम नहीं हो सका।
6. येन-केन प्रकारेण चर्चा में बने रहे नरेंद्र मोदी
भाजपा की जीत में बड़ी वजह उनका हमेशा चर्चा में बने रहना रहा। इसके लिए भाजपा ने पहले से ही तैयारी कर रखी थी। चरण-दर-चरण उनकी आक्रामकता बढ़ती गयी। भारतीय सेना के नाम पर वोट मांगने से लेकर अभिनेता अक्षय कुमार के साथ उनके गैर राजनीतिक इंटरव्यू ने भी उन्हें चर्चा में बनाए रखा। जबकि विपक्षी नेताओं के चेहरे मीडिया में आए तो जरूर लेकिन जनता को उनसे कोई मसाला नहीं मिला जो उन्हें या तो गुदगुदा सके या फिर प्रेरित कर सके। उनके भाषणों में केवल नरेंद्र मोदी का विरोध था। जबकि नरेंद्र मोदी के भाषणों में किसी सुपरहिट फिल्म के जैसे सारे मसाले थे।
7. अजहर मसूद पर प्रतिबंध
भारतीय जनता का नरेंद्र मोदी पर विश्वास उस समय और बढ़ गया जब संयुक्त राष्ट्र संघ ने पाकिस्तानी आतंकी अजहर मसूद को अंतरराष्ट्रीय आतंकी करार दिया। इसे भाजपा और नरेंद्र मोदी ने इस रूप में पेश किया कि यह सब उनके प्रयासों के कारण ही संभव हुआ। चीन को मनाने का श्रेय भी इन्हें ही मिला। भाजपा की रणनीति ही रही कि आम जनता के दिमाग से वह तथ्य भी गायब हो गया कि इसी अजहर मसूद को अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने रिहा किया था।
8. नोटबंदी और जीएसटी मामले में भी विपक्ष को मिली हार
यह नरेंद्र मोदी के प्रति भारतीय जनता का विश्वास ही रहा कि नोटबंदी और जीएसटी के कारण अर्थव्यवस्था की डांवाडोल स्थिति भी मुद्दा नहीं बन सका।हालांकि इसकी पूरी कोशिश विपक्ष ने की, लेकिन जनता ने नरेंद्र मोदी के इन दोनों फैसलों का समर्थन किया। नरेंद्र मोदी अर्थशास्त्री नहीं होने के बावजूद यह बताने में सफल रहे कि इन दाेनों फैसलों से देश की आर्थिक स्थिति सुदृढ हुई है।
9. मजबूत नेता की छवि का लाभ
नरेंद्र मोदी को इस बार के चुनाव में सबसे अधिक लाभ इस छवि के कारण मिला कि वे मजबूत नेता हैं। जम्मू-कश्मीर में आतंकी हमले के बाद बालाकोट हमले को उन्होंने जिस तरीके से चुनावी लाभ के लिए भुनाया विपक्षी दलों ने उनकी आलोचना अवश्य की। लेकिन देश की जनता इससे संतुष्ट दिखी कि भारत अब केवल हमले सहता नहीं है बल्कि पलटकर जवाब भी देता है।
10. अमित शाह का प्रबंधन और चुनावी गुणा-भाग
इस चुनाव में भाजपा के रणनीतिकार और अध्यक्ष अमित शाह की रणनीति एक बार फिर कारगर साबित हुई। लगातार काम, छोटे से छोटे कार्यकर्ताओं से सीधा संपर्क, बेहतर मैनजमेंट, विपक्षी को उसी के मुद्दों पर जाकर घेरना और सही उम्मीदवारों का चयन एक बार फिर से भाजपा को केंद्र की सत्ता में ले आया।