Advertisement Carousel

आत्महत्या की रिर्पोटिंग संवेदनशीलता के साथ हो…आरती धर

अम्बिकापुर / राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत आज संभाग मुख्यालय अम्बिकापुर में मीडिया प्रतिनिधियों की आत्महत्या की रिर्पोटिंग की सनसनीखेज प्रस्तुत न कर संवेदनशीलता के साथ कार्यशाला सम्पन्न हुई। कार्यशाला में सरगुजा, कोरिया, जशपुर एवं बलरामपुर – रामानुजगंज जिले के प्रिन्ट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के प्रतिनिधि शामिल हुए।

कार्यशाला में आत्महत्या की घटनाओं के सनसनीखेज प्रस्तुतीकरण एवं उसके समाज में प्रभाव के संबंध में विस्तारपूर्वक चर्चा की गई। कार्यशाला में दिल्ली से आए विशेषज्ञांे द्वारा समाज में विभिन्न कारणों से हो रही आत्महत्याओं के संबंध में जानकारी देते हुए मीडिया प्रतिनिधियों से आग्रह किया गया कि आत्महत्या के समाचार की प्रस्तुति इस प्रकार हो कि लोग आत्महत्या को एक घृणित कार्य समझे तथा कोई भी, किसी भी उम्र का व्यक्ति आत्महत्या के लिए प्रेरित न हो, बल्कि वह स्वयं भी इससे दूर रहे तथा अन्य लोगों को भी ऐसा न करने की समझाईश दे।

विशेषज्ञांे ने बताया कि कुछ समाचारों में आत्महत्या की घटना की प्रस्तुती सनसनीखेज रूप से की जाती है जिससे मानसिक रूप से दुर्बल लोग ऐसे कृत्य को सहज मान लेते हैं। विशेषज्ञांे ने बताया कि आत्महत्या के समाचार की प्रस्तुति पर विशेष ध्यान देते हुए इसे एक घृणितकृत्य बताते हुए हतोत्साहित करना चाहिए। ऐसी कोशिश होनी चाहिए कि आत्महत्या के स्थान पर यदि वह व्यक्ति धैर्य एवं साहस का परिचय देते हुए जीवन से संघर्ष करता तो एक सफल जीवन का निर्वहन कर सकता था। वास्तव में आत्महत्या एक घृणित कार्य है और समाज के प्रत्येक जिम्मेदार व्यक्ति को इसकी भर्त्सना करनी चाहिए तथा लोगों को सकारात्मक जीवन जीने की प्रेरणा देनी चाहिए। वर्तमान में समाज में मीडिया के महत्वपूर्ण दायित्व को दृष्टिगत रखते हुए मीडिया प्रतिनिधियों के माध्यम से आत्महत्या की घटनाओं को हतोत्साहित करने एवं रोकने में मदद मिल सकती है।

कार्यशाला में सुश्री आरती धर, अतिक जायदी, नदीम अहमद, सीएमएचओ डॉ. पी.एस. सिसोदिया, डॉ संदीप, डॉ. पी.के. सिन्हा सहित अन्य अधिकारी एवं पत्रकारगण उपस्थित थे।

error: Content is protected !!