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माघी पुन्नी मेला के उदघाटन सत्र में पहुँचे CM भुपेश, कहा – साधु-संत अपना आशीर्वाद छत्तीसगढ़ पर हमेशा बनाए रखें …

रायपुर / 9 फरवरी से 21 फरवरी तक आयोजित होने वाले राजिम माघी पुन्नी मेले की आधिकारिक शुरुआत राजिम के मुख्य मंच से मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा देश के विभिन्न हिस्सों से आए साधु-संतों की उपस्थिति में की गई .

मुख्यमंत्री ने पंडितों के मंत्रोच्चार के बीच सबसे पहले मंच पर स्थापित भगवान राजीवलोचन की प्रतिमा की पूजा-अर्चना की, जिसके बाद राजकीय गीत अरपा पैरी के धार का साउंड सिस्टम के माध्यम से सामूहिक गायन किया गया . इस दौरान मंच पर उपस्थित समस्त अतिथि और दर्शक दीर्घा में मौजूद दर्शक राजकीय गीत के सम्मान में खड़े रहे .

इसके बाद संबोधन के क्रम में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मेले के आधिकारिक शुरुआत की घोषणा करते हुए कहा राजिम सहित संपूर्ण छत्तीसगढ़ की पहचान राजिम मेले को पिछले वर्ष से पुनः मूल स्वरूप में सरकार द्वारा आयोजित किया जा रहा है . त्रिवेणी संगम की सूखी धरती पर मेला आयोजित किए जाने से कई प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता है इसलिए मेले के लिए राजिम में 25 एकड़ भूमि का चयन किया जा चुका है और आगामी वर्ष से मेला उसी स्थल पर आयोजित किया जाएगा . मुख्यमंत्री ने कहा उनकी सरकार राज्य में स्थित भगवान राम के समस्त वन गमन मार्ग को विकसित करने जा रही है . साथ ही जानकारी दी कि सरकारी धान की खरीदी तिथि 5 दिन बढ़ा दी गई है . केंद्र सरकार के इंकार के बाद भी राज्य सरकार द्वारा किसानों का धान 25 सौ रुपए क्विंटल में खरीदा जा रहा है, जिसके अंतर की राशि 650 रुपए रुपए किसानों के बैंक खाते में सीधे भेजी जाएगी . इसके लिए 24 फरवरी से शुरू हो रहे राज्य के बजट सत्र में राशि स्वीकृत की जाएगी . मुख्यमंत्री ने मंच पर उपस्थित साधु-संतों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि साधु संतों के आशीर्वाद से छत्तीसगढ़ आगे बढ़ रहा है . साधु-संत अपना आशीर्वाद छत्तीसगढ़ पर हमेशा बनाए रखें .

मुख्यमंत्री के साथ गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू, खाद्य मंत्री अमरजीत भगत, आबकारी मंत्री कवासी लखमा सहित अन्य अतिथि भी पहुंचे थे . सभी पहले मुख्य मंच के बगल में ही बनाए गए महानदी आरती स्थल पहुंचे और साध्वी प्रज्ञा भारती के नेतृत्व में मेले में प्रतिदिन शाम 7 से 8 बजे तक होने वाले महानदी आरती में शामिल हुए .

बता दें कि पूर्वर्ती रमन सरकार द्वारा अपने कार्यकाल के 15 वर्षों तक राजिम मेला की जगह राजिम कुंभ के नाम से आयोजन किया जाता रहा, जिसे छत्तीसगढ़ी संस्कृति पर कुठाराघात मानते हुए सत्ता में आई भूपेश सरकार द्वारा पिछले वर्ष से राजिम कुंभ को पुनः राजिम माघी पुन्नी मेला के नाम से आयोजित किया जा रहा है . आज से शुरू हुआ यह मेला 21 फरवरी महाशिवरात्रि तक जारी रहेगा ।

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