राज्यसभा की गरिमा से अनभिज्ञ है भाजपा जिलाध्यक्ष, अपनी पार्टी की दुर्दशा सुधारने की चिंता करे यादव – रूपेश दुबे

राजनांदगांव / प्रदेश कांग्रेस लीगल सेल के महामंत्री व जिला कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता रुपेश दुबे ने छत्तीसगढ़ से राज्यसभा के लिए कांग्रेस पार्टी की ओर से चयनित नाम पर राजनांदगांव जिला भाजपा अध्यक्ष मधुसूदन यादव के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि भाजपा जिला अध्यक्ष अपनी पार्टी की जिले में दुर्दशा सुधारने में ध्यान दें छत्तीसगढ़ की जनता ने 15 वर्षीय भाजपा को सत्ता से जिस प्रकार से उखाड़ फेंक कर 14 के आंकड़ों में सीमेट कर कांग्रेस को सत्ता सौपी है ऐसे में सत्ताधारी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के निर्णय पर टिप्पणी ना करें।

क्योंकि राज्यसभा सदस्य के लिए पार्टी क्षेत्रीयता पर नहीं राष्ट्रीय सोंच पर निर्णय लेती है क्योंकि संविधान निर्माताओं ने बौद्धिक अपने क्षेत्र में महारत प्राप्त व्यक्तित्व के अनुभव का लाभ लेने के लिए राज्यसभा में नियुक्त करने का प्रावधान रखा गया है उसी परिपेक्ष में हमारी राष्ट्रीय अध्यक्ष माननीया सोनिया गांधी जी ने के टी एस तुलसी जो कि सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठतम अधिवक्ता एवं भारत सरकार के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल रहे को छत्तीसगढ़ से राज्यसभा से कांग्रेस प्रत्याशी बनाया है।

प्रवक्ता दुबे ने कहा कि भाजपा जिला अध्यक्ष को इस बात का आभास नहीं है क्या कि जब छत्तीसगढ़ में भाजपा सरकार थी और उच्च न्यायालय बिलासपुर में महाधिवक्ता नियुक्ति के लिए भाजपा ने पूरे प्रदेश के अधिवक्ताओं को दरकिनार कर नागपुर से श्री गिल्डा की नियुक्ति की थी और अभी हाल ही में पत्रकारिता विश्वविद्यालय में राज्य के बाहर के व्यक्ति को कुलपति बनाकर बिठाने से जो छत्तीसगढ़ के पत्रकारिता शिक्षा जगत में बवंडर मचा महामहिम राज्यपाल को हस्तक्षेप कर भाजपा युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं के भरोसे पदभार ग्रहण हुआ वह राज्य की जनता देख चुकी है ।रही बात खामियाजा की तो यादव जी आप स्वयं बताएं कि जब आप सांसद थे और आपकी टिकट आपके पार्टी भाजपा ने काट दी तो आपको आपके किस खामियाजा की सजा भुगतनी पड़ी इस बात को सार्वजनिक करें। माननीय तुलसी जी के व्यक्तित्व के बारे में आप पहले जानने का प्रयास करें संगठनात्मक गतिविधियों में नेतृत्व करने वाले मधुसूदन यादव शायद यह भूल गए की जब संगठन को कोई निर्णय करना होता है तो अनेक पहलुओं को ध्यान में रखकर निर्णय लिया जाता है और पार्टी के निर्णय के खिलाफ पार्टी के पदाधिकारियों कार्यकर्ता नहीं जाते पार्टी नेतृत्व कुशल व्यक्तित्व का चयन/निर्णय करती है राज्यसभा के मामले में निर्णय किस स्तर पर होता है यह जानकारी भाजपा जिलाध्यक्ष को होना चाहिए और प्रदेश और देश स्तर के पार्टी संगठन के निर्णय के खिलाफ किसी दूसरी पार्टी के जिला स्तर के नेता को बयानबाजी नहीं करना चाहिए रही क्योकि ये पार्टीगत निर्णय होते है। बात छत्तीसगढ़िया की तो मुख्यमंत्री माननीय भूपेश बघेल जी के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ की संस्कृति को सवारने एवं बढ़ाने का कार्य जिस तीव्र गति से चल रहा है जिसके कारण भाजपाई अपने आप को ठगे से महसूस कर रहे हैं और सत्ता से बाहर होने के कारण मानसिक अवसाद के कारण अनर्गल बयानबाजी कर रहे हैं भाजपा जिला अध्यक्ष केरल निवासी के.राजगोपालन जी के राज्यसभा निर्वाचन की बात को शायद भूल गए होंगे या उनकी जानकारी में नहीं होगी । माननीय वोरा जी और माननीया करुणा शुक्ला जी के सबंध में जो बातें उनकी उपेक्षा के संबंध में कही है तो उस संबंध में यादव जी को याद होना चाहिए कि वे स्वयं विधानसभा चुनाव में डोंगरगांव के जमीनी कार्यकर्ताओं का हक मारकर स्वयं प्रत्याशी बने और जमीनी कार्यकर्ता और जनता ने नकार दिया। भाजपा अपने सदस्यों के वोट भी उनके प्रत्याशी को नहीं मिल पाएंगे इस डर से भाजपा इस चुनाव में अपना प्रत्याशी उतारने का भी साहस नहीं कर सकी । भाजपा के कई वरिष्ठ नेता अपने प्रदेश से नही विभिन्न प्रदेशों से राज्यसभा में गए है।

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