00 महिला की हालत गंभीर होने पर खडगंवा अस्पताल में कराया भर्ती, अब खतरे से बाहर
कोरिया चिरिमिरी / खड़गवां की नेवारीबहरा पंडो बस्ती कटकोना ग्राम पंचायत में सौ से अधिक मकान है जहां पंडों जनजाति के रहवासी निवासरत है लेकिन यहां आने जाने के लिए सड़क की हालत खस्ता है लोग पगडंडी मार्ग का उपयोग करते है। दूसरी ओर प्रषासन का अमला विकास के दावे कर रहा है लेकिन इसकी जमिनी हकीकत कुछ और ही है। यहां आज तक सडक नहीं बन सकीं है। जिसका दंष ग्रामीण लोग झेल रहे है।
यह मामला तब उजागर हुआ जब गांव के सुनीता पंडो को प्रसव पीड़ा होने पर बीते 3 जून को उसके घर में डिलीवरी कराई गई थी। प्रसव के दो दिन बाद से महिला के स्वास्थ्य में गिरावट आने लगी थी। शुक्रवार को महिला के अचानक बेहोश हो जाने पर परिजनों ने 108, 102 से संपर्क किया लेकिन एंबुलेंस नहीं मिल सकीं। इसके बाद चिरमिरी से 108 एंबुलेंस को गांव में बुलाया गया।
जानकारी के मुताबिक ग्रामीणों को पहाड़ का 3 किमी का सफर पैदल ही तय किया। महिला को खाट में लिटाकर बारी-बारी से उसे कांधे में ढोकर उस स्थान तक लाया गया, जहां 108 संजीवनी एक्सप्रेस खड़ी थी। वहां से महिला को अस्पताल पहुंचाया गया।
मामले में जानकारी देते हुए ग्रामीण रामलाल ने बताया कि खून की कमी से स्वास्थ्य में आई गिरावट और गंभीर स्थिति को देखते हुए प्रसूता को अस्पताल तक पहुंचाने के लिए परिजनों को काफी मशक्कत करना पड़ा। पहाड़, खेत, नाला का रास्ता तय करने के दौरान खाट को ढोने में ग्रामीणों ने भी मदद की। बारी बारी से खाट को उठाकर प्रसूता को एंबुलेंस तक पहुंचाया । गांव को सड़क से जोड़ने ग्रामीणों ने कई बार गुहार लगाई है लेकिन कोई पहल नहीं हुई।
मिट्टी में फसी वाहन, पलटते-पलटते बची –
एम्बुलेंस गांव पहुंचने से पहले बीच मार्ग में ही जमीन में नमी के कारण मिट्टी में फंस गई और पलटते-पलटते बची। इसके आगे एंबुलेंस नहीं जाने पर परिजन जच्चा बच्चा को खाट पर तीन किमी लेकर पैदल चले। फिर यहां से संजीवनी एक्सप्रेस से जच्चा बच्चा को खड़गवां अस्पताल लाकर भर्ती कराया गया। यहां इलाज जारी है।
महिला में खून की कमी इस वजह से अचेत –
चिकित्सकीय जांच में पता चला कि महिला के शरीर में खून कम है। खून चढ़ने के बाद स्वास्थ्य में सुधार की उम्मीद की जा रही है। बीएमओ डॉ एस कुजूर ने बताया कि नवजात स्वस्थ्य है, महिला की तबीयत थोड़ी बिगड़ी हुई है। घर पर डिलीवरी में हाइजिन मेंटेन और निमोनिया सहित अन्य इंफेक्शन के खतरे होते है, महिला का इलाज जारी है।
