कोरिया मनेन्द्रगढ़ / बलिदान दिवस अमर हुतात्मा डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी.. गगनभेदी हुंकार “वो कश्मीर हमारा है” के उदघोष के साथ भाजपा नगर मंडल द्वारा डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस पर कार्यकर्ताओं ने उन्हें अपनी श्रधांजलि दी।
नियत कार्यक्रम के अनुसार मुखर्जी वाटिका में कार्यकर्ताओं ने डॉ मुखर्जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण व पुष्पार्चन किया।इस अवसर पर मंडल अध्यक्ष धर्मेन्द्र पटवा ने कहा कि
डॉ श्यामा प्रसाद को देशप्रेम की सज़ा मिली थी और इनकी मृत्यु तक को बना दिया गया ऐसा रहस्य जिसे आज तक खोलने की किसी की भी हिम्मत नहीं हो पायी है । नकली धर्मनिरपेक्षता की आंधी और हिन्दू विरोध की सुनामी में अपने आप को स्वाहा कर के कश्मीर को बचा लेने वाले अमर बलिदानी श्यामा प्रसाद मुखर्जी की .. आज भी जब जब और जहाँ जहाँ ये नारे गूँजते हैं की जहाँ हुए बलिदान मुखर्जी वो कश्मीर हमारा है तो उस महान व्यक्ति की याद आ जाती है जिसे पहले जेल और बाद में मृत्यु इसलिए दे डाली गयी क्योकि उन्होंने कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग बताते हुए वहां कूच कर देने का एलान कर दिया ।
वरिष्ठ कार्यकर्ता राहुल सिंह ने इस मौके पर कहा कि विश्व का सबसे युवा कुलपति होने का सम्मान प्राप्त करने वाले“श्यामाप्रसाद मुखर्जी नेहरू की पहली सरकार में मंत्री थे. जब नेहरू-लियाक़त पैक्ट हुआ तो उन्होंने और बंगाल के एक और मंत्री ने इस्तीफ़ा दे दिया। उसके बाद उन्होंने जनसंघ की नींव डाली। विडम्बना यह है कि तात्कालीन सत्ता के खिलाफ जाकर सच बोलने की जुर्रत करने वाले डॉ. मुखर्जी को इसकी कीमत अपनी जान देकर चुकानी पड़ी, और उससे भी बड़ी विडम्बना की बात ये है कि आज भी देश की जनता उनकी रहस्यमयी मौत के पीछे की सच को जान पाने में नाकामयाब रही है।
वरिष्ठ भाजपा नेता अनिल केशरवानी ने इस अवसर पर कहा कि डॉ. मुखर्जी इस प्रण पर सदैव अडिग रहे कि जम्मू एवं कश्मीर भारत का एक अविभाज्य अंग है. उन्होंने सिंह-गर्जना करते हुए कहा था कि, “एक देश में दो विधान, दो निशान और दो प्रधान, नहीं चलेगा- नही चलेगा.” समान नागरिक संहिता बनाने की बात करने वालों ने भी कभी पलट कर ये नहीं जानना चाहा की किस ने और क्यों मारा कश्मीर के रक्षक श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी को? उस समय भारतीय संविधान के अनुच्छेद 370 में यह प्रावधान किया गया था कि कोई भी भारत सरकार से बिना परमिट लिए हुए जम्मू-कश्मीर की सीमा में प्रवेश नहीं कर सकता. डॉ. मुखर्जी इस प्रावधान के सख्त खिलाफ थे।
जिला कार्य समिति सदस्य दिनेश्वर मिश्रा ने इस अवसर पर कहा कि डॉ मुखर्जी का कहना था कि, “नेहरू जी ने ही ये बार-बार ऐलान किया है कि जम्मू व कश्मीर राज्य का भारत में 100% विलय हो चुका है, फिर भी यह देखकर हैरानी होती है कि इस राज्य में कोई भारत सरकार से परमिट लिए बिना दाखिल नहीं हो सकता।मुखर्जी ने कहा कि मैं नही समझता कि भारत सरकार को यह हक़ है कि वह किसी को भी भारतीय संघ के किसी हिस्से में जाने से रोक सके क्योंकि खुद नेहरू ऐसा कहते हैं कि इस संघ में जम्मू व कश्मीर भी शामिल है.” उन्होंने इस प्रावधान के विरोध में भारत सरकार से बिना परमिट लिए हुए जम्मू व कश्मीर जाने की योजना बनाई।
भाजपा नेत्री अलका गाँधी ने इस मौके पर कहा कि 1950 के आसपास ईस्ट पाकिस्तान में हिन्दुओं पर जानलेवा हमले शुरु हो गये. करीब 50 लाख हिन्दू ईस्ट पाकिस्तान को छोड़ भारत वापस आ गए। हिन्दुओं की यह हालत देखकर मुखर्जी चाहते थे कि देश पाकिस्तान के खिलाफ सख्त कदम उठाए। वह कुछ कहते इससे पहले जवाहरलाल नेहरु और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री लियाकत अली खान ने समझौता कर लिया था। समझौते के मुताबिक दोनों देश के रिफ्यूजी बिना किसी परेशानी के अपने-अपने देश आ जा सकते थे। श्यामा प्रसाद मुखर्जी को नेहरु जी की यह बात बिल्कुल पसंद नहीं आई। उन्होंने तुरंत ही कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया। इस्तीफ़ा देते ही उन्होंने रिफ्यूजी की मदद के काम में खुद को झोंक दिया।
जिला कार्य समिति सदस्य दिनेश्वर मिश्रा ने कहा कि ‘एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान नहीं चलेंगे’ के नारे के साथ डॉ मुखर्जी कश्मीर के लिए निकल पड़े।नेहरु को इस बात की खबर हुई तो उन्होंने हर हाल में मुखर्जी को रोकने का आदेश जारी कर दिया. उन्हें कश्मीर जाने की इजाजत नहीं थी।ऐसे में मुखर्जी के पास गुप्त तरीके से कश्मीर पहुंचने के सिवा कोई दूसरा विकल्प न था।वह कश्मीर पहुंचने में सफल भी रहे।
इस अवसर पर पूर्व मण्डल अध्य्क्ष जे के सिंह ने कहा कई लोग मुखर्जी की मौत के वाजिब कारण को जानना चाहते थे। लोगों ने आवाजें भी उठाई, लेकिन सरकार के सामने किसी की एक नहीं चली। नतीजा यह रहा कि उनकी मौत का रहस्य उनके साथ ही चला गया।इतने सालों बाद भी किसी के पास जवाब नहीं है कि उनकी मौत के पीछे की असल वजह क्या थी? आज कश्मीर की अखंडता के उस महान रक्षक अमर बलिदानी श्यामा प्रसाद मुखर्जी को उनके बलिदान दिवस पर बारम्बार नमन करते हुए भाजपा परिवार उनकी गाथा को सदा सदा के लिए अमर रखने का संकल्प लेता है। इस अवसर पर भाजपा मंडल अध्यक्ष धर्मेंद्र पटवा, दिनेश्वर मिश्र , जे के सिंह ,अनिल केशरवानी, राहुल सिंह,जोसेफ जार्ज, शुशील सोनी, अलका गांधी माहेश्वरी सिंह मीनू सिंह गीता पाशी रूबी पाशी उमा शंकर पाशी मनोज त्रिपाठी संजीव सिंह संजय गुप्ता दिलीप नायर हीरा लाल रजक किशन देव चंद्र शेखर पटेल आलोक जैसवाल हरित शर्मा विवेक अग्रवाल रामचरित द्विवेदी राज कुमार गुप्ता प्रमोद बंशल नवल किशोर शर्मा अखिलेश शर्मा जोशफ जार्ज अज्जिमुद्दीन अंशरी जगत राम केवट मुरलीधर शोनी हरिलाल यादव प्रवीण सिंह संतोष मालिक जय मालिक इरशाद अंशरी जलील शाह समय लाल गुरुजी
