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छग में फिर कंधों पर ढोई गई मरीज, किसी तरह बची महिला की जान

जशपुर / छत्तीसगढ़ सरकार के मुखिया मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री प्रदेश के जिले दौरे में लोगों के पास जाकर उनकी समस्या से रूबरू हो रहे हैं। कई समस्याओं का निदान जरूर ही हो रहा हैं पर जो समस्या वर्षो से धरी पड़ी हैं उन समस्याओं को निराकरण न जाने प्रदेश में कब होगा।

आपको बता दे कि छत्तीसगढ़ में आज भी कई गांव ऐसे हैं। जो पहुंचविहीन हैं। फिलहाल मामला जशपुर का हैं जहाँ सड़क के अभाव में एक मरीज को उसके परिजन भरी धूप में एंबुलेंस तक ले गए। एंबुलेंस को सूचना मिलने के बाद भी गाड़ी गांव तक नहीं पहुंच पाई। पूरा मामला जिले के महनई ग्राम पंचायत के बांसाझरिया टोला का है।

बांसाझरिया टोला पहाड़ के ऊपर बसा है। इस बस्ती में करीब 20 आदिवासी परिवार रहते हैं। बताया जा रहा है कि यहीं रहने वाली मोहरमनी(40) पिछले एक हफ्ते से ब्लीडिंग की समस्या से परेशान थी। मगर घर वाले ये मान रहे थे कि उस पर किसी ने जादू टोना किया है। इसलिए परिजन उसे अस्पताल नहीं ले जा रहे थे। इस बीच शुक्रवार सुबह जब उसे अधिक दर्द शुरू हुआ तो आस-पास के लोगों की मदद से संजीवनी एंबुलेंस को इसकी सूचना दी गई थी। गर्मी में इस तरह के ऊबड़ खाबड़ रास्ते से किसी तरह परिजन महिला को उठाकर ले आए।

जानकारी के मुताबिक, सूचना मिलने पर एंबुलेंस चालक गाड़ी लेकर गांव जा ही रही था। मगर गांव से एक किलोमीटर पहले लोटाडांडी में एंबुलेंस आकर रुक गई। इसके बाद सड़क ही नहीं थी। ऐसे में एबुलेंस आगे नहीं जा सकी। एबुलेंस चालक ने कई बार संबंधित शख्स को फोन किया, लेकिन मोबाइल नेटवर्क भी नहीं होने से उसका संपर्क नहीं हो सका। इसलिए एबुंलेंस चालक आस-पास परिजनों को तलाशता रहा।

इधर, जब परिजनों ने काफी देर तक गाड़ी का इंतजार किया और एंबुलेंस गाड़ी नहीं आई तो वे कांवर में ही महिला को लेकर घर से निकल गए। परिजनों ने बताया कि रास्ता नहीं होने और जो रास्ता है वह पहाड़ी होने की वजह से हमें करीब 2 घंटे लोटाडांडी ही जाने में लग गए। काफी मशक्कत के बाद हम वहां पहुंचे तब हमें एंबुलेंस मिली। इसके बाद महिला को बगीचा के अस्पताल में भर्ती कराया गया है। अब इलाज के बाद महिला की हालत में सुधार है।

महिला के परिजनों को रास्ते में कई जगह रुकना भी पड़ा।

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