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भारत माला प्रोजेक्ट में घोटाले का आरोप, विधानसभा में तीसरी बार हंगामा

रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र में एक बार फिर भारत माला प्रोजेक्ट के तहत मुआवजा वितरण में गड़बड़ियों का मुद्दा गूंजा। विपक्ष ने इस मामले में सीबीआई जांच की मांग उठाई, जिसे सरकार ने खारिज कर दिया। इसे लेकर सदन में तीखी नोकझोंक देखने को मिली। नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने सरकार को चुनौती देते हुए कहा कि अगर सरकार ईमानदार है, तो इस मामले की सीबीआई जांच कराए, अन्यथा विपक्ष हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएगा।

तीसरी बार सदन में गूंजा भारत माला प्रोजेक्ट का मुद्दा
भारत माला प्रोजेक्ट के तहत रायपुर से विशाखापट्टनम तक बनने वाले इकोनॉमिक कॉरिडोर के लिए कई गांवों की जमीन अधिग्रहित की गई थी। इस दौरान किसानों को दिए जाने वाले मुआवजे में करोड़ों रुपए की हेराफेरी सामने आई है। बजट सत्र के पहले सप्ताह से ही नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत इस मामले को उठा रहे हैं। पहले चरण में सरकार ने जानकारी एकत्र करने की बात कही, लेकिन जब दूसरे सप्ताह जवाब आया, तब तक प्रश्नकाल समाप्त हो चुका था।

अब तीसरे सप्ताह में राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने संक्षिप्त जानकारी देते हुए स्वीकार किया कि मुआवजा वितरण में गड़बड़ी हुई है। लेकिन उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया कि सरकार को सीबीआई जांच की जरूरत नहीं लगती। इस बयान के बाद विपक्ष ने सरकार को घेरते हुए सदन में हंगामा किया और सीबीआई जांच की मांग को दोहराया।

50 करोड़ की गड़बड़ी, 300 करोड़ का नुकसान!
नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि मुआवजा वितरण में बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार हुआ है। उन्होंने आंकड़े पेश करते हुए बताया कि 6 गांवों में प्रकाशन होने के बाद करीब 50 करोड़ रुपये की गड़बड़ी उजागर हुई है।

इसके अलावा,

  • 32 प्लॉटों को 247 टुकड़ों में बांटकर हेराफेरी की गई।
  • नायकबांधा गांव में 13 खसरों को 53 प्लॉटों में विभाजित किया गया।
  • भारत सरकार को इससे 300 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ।

डॉ. महंत ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा इस परियोजना के लिए जारी धन में चोरी हो रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार इस मामले में जांच को दबाने का प्रयास कर रही है।

मुख्यमंत्री का पलटवार, सीबीआई जांच पर कसा तंज
विपक्ष की सीबीआई जांच की मांग पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने तंज कसते हुए कहा कि “जब कांग्रेस की सरकार थी, तब उन्होंने ही सीबीआई को बैन कर दिया था। अब वे खुद सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं।” मुख्यमंत्री के इस बयान से सदन में हंगामा और बढ़ गया।

विपक्ष की हाईकोर्ट जाने की चेतावनी
सीबीआई जांच की मांग पर सरकार के अड़ियल रुख को देखते हुए नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने साफ कर दिया कि अगर सरकार निष्पक्ष जांच के लिए तैयार नहीं होती, तो विपक्ष इस मामले को हाईकोर्ट तक ले जाएगा। उन्होंने कहा कि “अगर सरकार को कोई डर नहीं है, तो वह सीबीआई जांच से क्यों भाग रही है? अगर सीबीआई जांच नहीं होगी, तो हम न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे, जहां दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।”

राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा का बचाव
वहीं, राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने सफाई देते हुए कहा कि “इस मामले की जांच के लिए सीबीआई की जरूरत नहीं है।” उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार स्वयं इस मामले की जांच करवाकर दोषियों पर कार्रवाई करेगी।

क्या है भारत माला प्रोजेक्ट?

भारत माला प्रोजेक्ट केंद्र सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है, जिसके तहत देशभर में सड़क नेटवर्क को विकसित किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ में रायपुर से विशाखापट्टनम तक इकोनॉमिक कॉरिडोर बनाया जा रहा है, जिसके लिए कई गांवों की जमीन अधिग्रहित की गई थी। इसी भूमि अधिग्रहण के दौरान मुआवजे में बड़े पैमाने पर हेरफेर का आरोप लगा है।

अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि विपक्ष हाईकोर्ट में याचिका दायर करता है या नहीं। वहीं, सरकार इस मामले को लेकर जांच के अन्य विकल्पों पर विचार कर सकती है। लेकिन इस पूरे घटनाक्रम से यह साफ हो गया है कि भारत माला प्रोजेक्ट में हुए कथित घोटाले का मामला जल्द शांत होने वाला नहीं है।

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