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छत्तीसगढ़ वन विभाग में प्रतिबंधित नारकोटिक ड्रग Etorphine की हेराफेरी का आरोप, उच्च स्तरीय जांच की मांग

रायपुर, 19 मार्च 2025 – वन्य जीव संरक्षण के नाम पर छत्तीसगढ़ वन विभाग में Etorphine नामक प्रतिबंधित नारकोटिक ड्रग की अवैध हेराफेरी और उपयोग के गंभीर आरोप सामने आए हैं। वन्यजीव प्रेमियों ने इस मामले की उच्च स्तरीय जांच कर नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) को सौंपने की मांग की है।

बिना लाइसेंस के ड्रग प्राप्ति और गड़बड़ी का आरोप

सूत्रों के अनुसार, वर्ष 2019-20 में छत्तीसगढ़ वन विभाग के पास Etorphine रखने और उपयोग करने का कोई लाइसेंस नहीं था, फिर भी इसे दुधवा टाइगर रिजर्व और भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून से मंगवाया गया। फरवरी 2020 में असम के मानस टाइगर रिजर्व से दो वन भैंसे लाने के लिए इसका इस्तेमाल हुआ।

विशेषज्ञों के अनुसार, एक वन भैंसे को बेहोश करने में 0.8 एमएल Etorphine की जरूरत होती है, यानी दो भैंसों के लिए 1.6 एमएल पर्याप्त था, लेकिन स्टॉक रजिस्टर में 7.8 एमएल खपत दिखाई गई6.2 एमएल अतिरिक्त ड्रग कहां गई, इसका कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है।

लाइसेंस जंगल सफारी के लिए, पर ड्रग पहुंची असम!

छत्तीसगढ़ आबकारी विभाग ने अगस्त 2021 में पहली बार जंगल सफारी परिसर में उपयोग के लिए Etorphine का लाइसेंस जारी किया। लाइसेंस की शर्तों के अनुसार, ड्रग का उपयोग केवल जंगल सफारी, नया रायपुर के परिसर में ही किया जा सकता था, लेकिन मार्च 2023 में प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) के आदेश पर इसे असम भेजा गया

जंगल सफारी के दस्तावेजों के अनुसार, डायरेक्टर जंगल सफारी को इस ड्रग के बाहर उपयोग की कोई जानकारी नहीं थी। बिना किसी लिखित प्रिस्क्रिप्शन के वन्यप्राणी चिकित्सकों ने स्टॉक से ड्रग निकाल ली और असम पहुंच गए।

लाइसेंस की अनदेखी पर आबकारी विभाग ने रोकी अनुमति

2023 के अंत में गौर (वन्य बैल) को बारनवापारा अभयारण्य से गुरु घासीदास नेशनल पार्क ले जाने के लिए Etorphine के उपयोग की अनुमति मांगी गई, लेकिन उपायुक्त आबकारी, रायपुर ने अनुमति देने से इनकार कर दिया

आबकारी विभाग ने स्पष्ट किया कि लाइसेंस केवल जंगल सफारी परिसर के लिए था, अन्य जिलों के लिए नहीं। इससे साबित होता है कि लाइसेंस की शर्तों को दरकिनार कर प्रतिबंधित ड्रग्स का उपयोग हुआ

वन्यजीव प्रेमियों ने की CBI या NCB जांच की मांग

रायपुर के वन्यजीव प्रेमी नितिन सिंघवी ने इस पूरे मामले पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा कि –

  1. जब ड्रग का उपयोग केवल जंगल सफारी परिसर में हो सकता था, तो इसे असम और अन्य जिलों में क्यों भेजा गया?
  2. 2020 और 2023 में स्टॉक से दिखाई गई अतिरिक्त ड्रग कहां गई?

उन्होंने इस मामले की CBI या NCB से जांच कराने की मांग की है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि Etorphine की गड़बड़ी सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही थी या इसके पीछे कोई बड़ा रैकेट काम कर रहा था

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