Advertisement Carousel

गुरुओं की विरासत का दुर्लभ दर्शन — सिख इतिहास की धरोहर पहली बार रायपुर में प्रदर्शित


450 वर्षों पुरानी अमूल्य सामग्रियों की झलकियां, गुरुद्वारा बाबा बुड्ढा जी साहब में 31 जुलाई से दर्शनार्थ उपलब्ध

रायपुर, 30 जुलाई |
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में सिख धर्म की ऐतिहासिक विरासत से जुड़ी 450 वर्षों पुरानी दुर्लभ और पवित्र वस्तुओं की पहली बार सार्वजनिक प्रदर्शनी आयोजित की जा रही है। यह ऐतिहासिक पहल गुरुद्वारा बाबा बुड्ढा जी साहब, तेलीबांधा में 31 जुलाई की शाम से शुरू होगी।

इस प्रदर्शनी में प्रसिद्ध इतिहासकार डॉ. भगवान सिंह खोजी द्वारा पंजाब से लाई गई उन दुर्लभ वस्तुओं को प्रस्तुत किया जाएगा, जो सिख धर्म के गुरुओं और उनके कालखंड की जीवंत धरोहर हैं।

प्रदर्शनी में शामिल प्रमुख वस्तुएं –

  • श्री गुरु हरगोबिंद सिंह जी की कृपाण, ढाल और कमंडल
  • महाराजा रणजीत सिंह कालीन नानकशाही सिक्के
  • गुरु हरगोबिंद सिंह जी की दुर्लभ तस्वीर
  • श्री गुरु गोविंद सिंह जी द्वारा पांच प्यारों को दिया गया हुक्मनामा साहिब
  • स्वर्ण स्याही में लिखी हुई ग्रंथ पुस्तक (गुरु गोविंद सिंह जी द्वारा रचित)
  • श्री गुरु अंगद देव जी के मूल 35 अक्षरों वाली गुरुमुखी लिपि
  • माता दामोदर जी का पीढ़ा और युद्ध रथ का घंटा

इन सभी वस्तुओं को देखने का अवसर छत्तीसगढ़वासियों को पहली बार मिलने जा रहा है। यह आयोजन न केवल सिख समाज के लिए बल्कि पूरे प्रदेश के इतिहास प्रेमियों और धार्मिक श्रद्धालुओं के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

समाज की अपील
छत्तीसगढ़ सिख समाज के प्रदेश अध्यक्ष सुखबीर सिंह सिंघोत्रा, मनमोहन सिंह सैलानी, गुरुद्वारा बाबा बुड्ढा जी साहब के प्रधान हरकिशन सिंह राजपूत समेत समाज के अनेक प्रमुख पदाधिकारियों ने श्रद्धालुओं से इस ऐतिहासिक आयोजन में भाग लेकर सिख परंपरा, धर्म और विरासत से जुड़ने की अपील की है।

यह आयोजन नई पीढ़ी को अपने धर्म और इतिहास से जोड़ने का एक दुर्लभ अवसर है, जो आत्मिक ऊर्जा, आध्यात्मिक अनुभूति और सांस्कृतिक गौरव का अद्वितीय संगम होगा।



error: Content is protected !!