मार्च 2026 तक साकार होगा नक्सलमुक्त भारत का संकल्प : मुख्यमंत्री साय
रायपुर, 11 सितम्बर 2025।
छत्तीसगढ़ में नक्सल मोर्चे पर सुरक्षा बलों ने ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। गरियाबंद जिले के मैनपुर के मटाल जंगल में सीआरपीएफ की कोबरा कमांडो, एसटीएफ, डीआरजी और जिला पुलिस के संयुक्त अभियान में हुई मुठभेड़ में अब तक 10 नक्सली मारे गए हैं। इनमें ₹1 करोड़ का इनामी और सीपीआई (माओवादी) की केंद्रीय समिति का सदस्य मोडेम बालकृष्णा उर्फ मनोज भी शामिल है।
भीषण मुठभेड़, जंगल में पड़े शव
मुठभेड़ की पुष्टि करते हुए रायपुर रेंज के आईजी अमरेश मिश्रा ने बताया कि जंगल में कई नक्सलियों के शव पड़े हैं। हालांकि इलाके में आईईडी (बारूदी सुरंग) लगाए जाने की आशंका है, जिसके चलते रात में सर्च ऑपरेशन रोकना पड़ा है। सुबह से फिर तलाशी अभियान शुरू होगा। सुरक्षा बल मौके पर डटे हुए हैं।
नारायणपुर में आत्मसमर्पण
इसी बीच नारायणपुर जिले में भी नक्सलियों ने मुख्यधारा में लौटने का रास्ता चुना। पंचायत मिलिशिया डिप्टी कमांडर, जनताना सरकार सदस्य और न्याय शाखा अध्यक्ष सहित कुल 16 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। सभी ने हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज में मिलकर विकास की धारा में शामिल होने का संकल्प लिया।
मुख्यमंत्री ने दी बधाई
गरियाबंद और नारायणपुर की इस बड़ी उपलब्धि पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सुरक्षा बलों को बधाई दी। उन्होंने कहा—
“सुरक्षा बलों की वीरता और जनता का विश्वास ही नक्सल उन्मूलन की असली ताकत है। यह घटनाएँ इस बात का स्पष्ट प्रमाण हैं कि नक्सलियों की झूठी विचारधारा अब दम तोड़ रही है। छत्तीसगढ़ में विश्वास, विकास और शांति की नई सुबह का उदय हो रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के मार्गदर्शन और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह जी के नेतृत्व में हमें पूरा विश्वास है कि मार्च 2026 तक ‘नक्सलमुक्त भारत’ का संकल्प साकार होगा।”
केंद्रीय गृहमंत्री का बयान
इस घटनाक्रम पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया पर लिखा—
“नक्सलियों के विरुद्ध हमारे सुरक्षा बलों ने आज एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। छत्तीसगढ़ में सीआरपीएफ, कोबरा, डीआरजी और पुलिस ने संयुक्त अभियान चलाकर 1 करोड़ के इनामी सीसीएम मोडेम बालकृष्णा सहित 10 कुख्यात नक्सलियों को मारा गिराया है। समय रहते बचे-खुचे नक्सली आत्मसमर्पण कर दें। आगामी 31 मार्च से पहले लाल आतंक का समूल नाश निश्चित है।”
बड़ी सफलता की ओर
गरियाबंद की इस मुठभेड़ और नारायणपुर में आत्मसमर्पण को छत्तीसगढ़ में नक्सल उन्मूलन अभियान की सबसे बड़ी उपलब्धियों में गिना जा रहा है। सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि शीर्ष कैडर के नक्सलियों के मारे जाने से उनकी संगठनात्मक क्षमता को करारा झटका लगा है।
