सैकड़ों परिवारों की आजीविका पर संकट का मामला उठाया
रायपुर। NIT चौपाटी हटाए जाने के विवाद को लेकर राजनीतिक हलचल तेज़ हो गई है। चौपाटी संचालकों को हटाए जाने से उत्पन्न आजीविका संकट को लेकर सोमवार को पूर्व महापौर एजाज़ ढेबर अपने प्रतिनिधि मंडल के साथ राजभवन पहुँचे और महामहिम राज्यपाल रमन डेका को विस्तृत ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले की जानकारी दी।
मुलाकात के दौरान ढेबर ने राज्यपाल को बताया कि चौपाटी संचालकों को बिना पूर्व सूचना, बिना सुनवाई और बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के अचानक हटाया गया, जिससे सैकड़ों परिवार बेरोज़गारी के संकट में फंस गए हैं। उन्होंने कहा कि यह केवल दुकानों का मामला नहीं, बल्कि प्रभावित परिवारों के जीवनयापन, बच्चों की पढ़ाई और दैनिक आवश्यकताओं से जुड़ा संवेदनशील मुद्दा है।
ज्ञापन में पूर्व महापौर ने यह भी उल्लेख किया कि वेंडर्स को जिस वैकल्पिक स्थान पर भेजे जाने की बात कही जा रही है, वहां पानी, बिजली, प्रकाश, शेड, सुरक्षा और स्वच्छता जैसी मूलभूत सुविधाएँ उपलब्ध नहीं हैं। साथ ही रेलवे द्वारा भूमि दावे किए जाने की स्थिति ने चौपाटी संचालकों को और अधिक असमंजस में डाल दिया है।
ढेबर ने राज्यपाल को यह भी अवगत कराया कि चौपाटी की स्थापना 2017-18 में “यूथ हब फूड कोर्ट मॉडल” के तहत की गई थी। यह परियोजना स्मार्ट सिटी कंपनी द्वारा केंद्र सरकार के कंसल्टेंट की सिफारिश पर और कलेक्टर की सहमति से लागू हुई थी, इसलिए चौपाटी अनधिकृत नहीं थी बल्कि एक पूर्व स्वीकृत और व्यवस्थित योजना का हिस्सा थी।
ज्ञापन सौंपते हुए ढेबर ने कहा कि इस मुलाकात का उद्देश्य किसी संस्थान या अधिकारी पर आरोप लगाना नहीं, बल्कि राज्य के सर्वोच्च संवैधानिक पद को इस मामले की पूरी, तथ्यात्मक और वास्तविक स्थिति से अवगत कराना है, ताकि भविष्य में निर्णय संवेदनशीलता और व्यावहारिकता के साथ लिए जा सकें।
राज्यपाल रमन डेका ने ज्ञापन को ध्यानपूर्वक सुना और विषय को संज्ञान में लेने का आश्वासन दिया। इस अवसर पर पूर्व महापौर एजाज़ ढेबर के साथ निगम में नेताप्रतिपक्ष आकाश तिवारी सहित प्रतिनिधि मंडल भी उपस्थित रहा, जिसने चौपाटी वेंडर्स, स्थानीय व्यापारियों और प्रभावित परिवारों की ओर से उठाई जा रही चिंताओं को राज्यपाल के समक्ष रखा।
