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कुत्तों के बाद अब सांप–बिच्छू भी भगाएंगे टीचर: नया निर्देश विवादों में ?

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शिक्षकों ने कहा — “बेतुका फरमान, पढ़ाने देंगे या जान जोखिम में डालें?”
अधिकारी बोले — सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुरूप किया गया परिपत्र


बिलासपुर। सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को पढ़ाई के अलावा गैर-शैक्षणिक कामों में झोंकने के आरोप के बीच शिक्षा विभाग ने एक और नया निर्देश जारी कर दिया है। अब शिक्षकों को स्कूलों में आवारा कुत्तों की निगरानी करने के साथ ही सांप, बिच्छू सहित अन्य जहरीले जीव–जंतुओं को स्कूल परिसर से दूर रखने की जिम्मेदारी भी दी गई है। विभाग के इस आदेश के बाद प्रदेशभर में शिक्षकों में भारी नाराज़गी फैल गई है।


(DPI) ने जारी किया नया निर्देश
निदेशक लोक शिक्षण (DPI) द्वारा जारी परिपत्र में कहा गया है कि स्कूल परिसर विद्यार्थियों के लिए पूरी तरह सुरक्षित होना चाहिए। इस सिलसिले में शिक्षकों को निम्न जिम्मेदारियां निभाने के निर्देश दिए गए हैं—

आवारा कुत्तों की आवाजाही पर नजर रखना
स्कूल परिसरों में सांप, बिच्छू और जहरीले जीव-जंतुओं को आने से रोकना

किसी भी प्रकार के जोखिम की जानकारी विभाग और स्थानीय प्रशासन को देना

स्कूल को स्वच्छ एवं सुरक्षित रखने के लिए निगरानी व्यवस्था सुनिश्चित करना


विभाग का कहना है कि यह निर्देश सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के पालन में जारी किया गया है और इसका उद्देश्य विद्यार्थियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देना है।


शिक्षकों का विरोध — “हम शिक्षक हैं, चिड़ियाघर के रखवाले नहीं”
नए आदेश ने शिक्षकों के बीच नाराज़गी और विरोध की लहर पैदा कर दी है। कई शिक्षकों ने कहा कि
“लाखों छात्रों की शिक्षा हमारे कंधों पर है, पर सरकार रोज नई जिम्मेदारी थमा रही है। पढ़ाएं या जान जोखिम में डालकर सांप-बिच्छू पकड़ें?”
शिक्षकों ने यह भी कहा कि पहले मध्याह्न भोजन, राशन वितरण, सर्वे कार्य और अन्य गैर-शैक्षणिक गतिविधियां थोप दी गईं, और अब जहरीले जीवों को भगाने की जिम्मेदारी पूरी तरह अमानवीय और अव्यवहारिक है।


“किसी हादसे पर जिम्मेदार कौन?”
शिक्षकों के संगठनों ने आशंका जताई है कि कुत्तों या विषैले जीवों को भगाने के दौरान दुर्घटना होने पर जोखिम किसकी जिम्मेदारी होगी, इसे आदेश में स्पष्ट नहीं किया गया। कई शिक्षकों का कहना है कि ग्रामीण और जंगल से लगे क्षेत्रों में सांप और बिच्छू का खतरा अधिक होता है। ऐसे में किसी शिक्षक के घायल या क्षतिग्रस्त होने पर शासन इससे हाथ झाड़ लेगा।


एक शिक्षा विभाग के एक अधिकारी ने कहा—
“यह जरूरी नहीं कि शिक्षक सीधे सांप या बिच्छू को पकड़ें। उन्हें केवल सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी सुनिश्चित करनी है। किसी भी खतरे की स्थिति में वे तत्काल स्थानीय प्रशासन और वन विभाग को सूचित कर सकते हैं।”


विभाग का तर्क है कि पिछले वर्षों में स्कूल परिसरों में कुत्ते और जहरीले जीवों के कारण कई घटनाएं हुई हैं, इसलिए सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना जरूरी है।


आदेश वापस लेने की मांग
प्रदेश शिक्षक संघ और अन्य संगठनों ने इस परिपत्र को जल्द वापस लेने की मांग करते हुए कहा कि बच्चों की शिक्षा लगातार प्रभावित हो रही है क्योंकि शिक्षकों को वास्तविक शिक्षण से हटाकर अलग-अलग कार्यों में लगाया जा रहा है।
संघ ने चेतावनी दी है कि यदि आदेश वापस नहीं लिया गया तो चरणबद्ध विरोध शुरू किया जाएगा।

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