जांजगीर-चांपा की शिकायत जांच में निराधार, नई मछली पालन नीति लाने का मिला आश्वासन
रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के प्रश्नकाल में गुरुवार को मछली पालन के लिए पट्टा आबंटन का मामला प्रमुखता से उठा। कांग्रेस विधायक कुंवर सिंह निषाद ने सरकार से पूछा कि प्रदेश में मछली पालन के लिए पट्टा आबंटन में किन समितियों और समूहों को पात्र माना जाता है तथा वर्तमान में कौन-सी नीति लागू है।
जवाब में आदिम जाति विकास मंत्री रामविचार नेताम ने बताया कि प्रदेश में नवीन मछली पालन नीति-2022 लागू है और इसी के प्रावधानों के अनुसार पात्र मछुआ समितियों एवं समूहों को पट्टा आबंटित किया जाता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान नीति में एक ही परिवार के एक से अधिक सदस्यों के किसी समिति में शामिल होने को लेकर कोई अलग प्रावधान नहीं है। राज्य शासन के विभिन्न अधिनियमों एवं नियमों के तहत पंजीकृत मछुआ समितियां और समूह पट्टा प्राप्त करने के पात्र हैं।
प्रश्न के दौरान जांजगीर-चांपा जिले के बम्हनीडीह के ग्राम सरहर तथा नगर पंचायत बलौदा में पट्टा आबंटन में अनियमितता के आरोपों का भी मुद्दा उठा। मंत्री ने बताया कि विभाग को इस संबंध में शिकायत प्राप्त हुई थी, जिसके बाद कलेक्टर द्वारा गठित जांच समिति ने मामले की जांच की। जांच में शिकायतों को निराधार पाया गया और किसी प्रकार की अनियमितता की पुष्टि नहीं हुई।
चर्चा के दौरान भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने कहा कि बदलते समय के अनुरूप मछली पालन नीति में संशोधन की आवश्यकता है और सरकार को नई नीति लानी चाहिए। इस पर विधानसभा अध्यक्ष ने सरकार से इस दिशा में पहल करते हुए जल्द नई मछली पालन नीति तैयार करने के निर्देश देने की बात कही।
इस चर्चा के साथ सदन में मछली पालन क्षेत्र में पारदर्शिता, पात्रता के मानदंड और भविष्य की नीति को लेकर व्यापक विमर्श हुआ।
