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बीएसपी में कथित 10 हजार करोड़ की लोहा चोरी का मामला, विधायक रिकेश सेन की शिकायत पर पीएम और गृह मंत्री ने लिया संज्ञान


भिलाई। भिलाई इस्पात संयंत्र में कथित तौर पर करीब 10 हजार करोड़ रुपये के लोहा चोरी के मामले ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है। वैशाली नगर विधायक रिकेश सेन की शिकायत पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा मामले का संज्ञान लिए जाने का दावा किया गया है। विधायक ने इस संबंध में सोशल मीडिया पर एक पत्र साझा करते हुए जल्द कार्रवाई होने की बात कही है।


विधायक रिकेश सेन ने सोशल मीडिया पोस्ट में मामले को राष्ट्रीय संपत्ति से जुड़ा गंभीर विषय बताते हुए कहा कि इस मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में लिखा कि “जल्द होंगी कार्रवाई, राष्ट्रीय संपत्ति को लूटने वाले जाएंगे जेल।” विधायक के इस दावे के बाद बीएसपी से जुड़े कथित लोहा चोरी के मामले को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।


बताया जा रहा है कि शिकायत में भिलाई इस्पात संयंत्र से बड़े पैमाने पर लोहा और अन्य सामग्री के कथित तौर पर चोरी अथवा अनियमित तरीके से बाहर जाने का आरोप लगाया गया है। शिकायत में कथित नुकसान की राशि करीब 10 हजार करोड़ रुपये बताए जाने से मामला बेहद गंभीर हो गया है। हालांकि, इस राशि और आरोपों की आधिकारिक जांच या अंतिम पुष्टि अभी सामने आना बाकी है।


विधायक रिकेश सेन लंबे समय से बीएसपी से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर आवाज उठाते रहे हैं। इसी क्रम में उन्होंने संयंत्र की संपत्ति की सुरक्षा, कथित चोरी और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर उच्च स्तर पर शिकायत की है। अब प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री स्तर पर संज्ञान लिए जाने की जानकारी सामने आने के बाद मामले में जांच और कार्रवाई को लेकर उम्मीद बढ़ी है।


जांच और कार्रवाई पर टिकी नजर
मामले में अब सबसे अहम सवाल यह है कि कथित लोहा चोरी के आरोपों की जांच किस एजेंसी से कराई जाती है और जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं। यदि शिकायत में लगाए गए आरोप जांच में सही पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारियों, कर्मचारियों या अन्य जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की स्थिति बन सकती है। वहीं, आरोपों की वास्तविकता और कथित 10 हजार करोड़ रुपये के नुकसान का आंकड़ा भी जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।


बीएसपी देश के प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र के इस्पात संयंत्रों में शामिल है और यहां होने वाली किसी भी वित्तीय या संपत्ति संबंधी अनियमितता को गंभीर माना जाता है। ऐसे में विधायक की शिकायत पर केंद्र स्तर से कथित संज्ञान की बात सामने आने के बाद अब आगे होने वाली कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।

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