नई दिल्ली। गणपति बप्पा के भक्तों के लिए वर्ष 2026 का गणेशोत्सव खास होने जा रहा है। इस बार गणेश उत्सव सामान्य 10 दिनों के बजाय 12 दिनों तक मनाया जाएगा। हिंदू पंचांग की तिथि गणना में विशेष संयोग के कारण गणेश स्थापना से लेकर अनंत चतुर्दशी तक की अवधि दो दिन अधिक रहेगी। ऐसा संयोग करीब नौ साल बाद बन रहा है। इससे पहले वर्ष 2017 में गणेशोत्सव 12 दिनों का रहा था।
14 सितंबर को होगी गणेश स्थापना
पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी 14 सितंबर, सोमवार को गणेश प्रतिमाओं की स्थापना की जाएगी। इसके बाद 25 सितंबर, शुक्रवार को अनंत चतुर्दशी के दिन गणपति विसर्जन के साथ उत्सव का समापन होगा।
तिथि गणना से बढ़ी उत्सव की अवधि
गणेशोत्सव की अवधि बढ़ने के पीछे हिंदू चंद्र पंचांग की तिथि गणना को प्रमुख कारण माना जा रहा है। तिथियों के घटने-बढ़ने और सूर्योदय के समय प्रभावी तिथि के आधार पर इस बार गणेश चतुर्थी से अनंत चतुर्दशी के बीच कुल 12 दिनों की अवधि बन रही है।
भक्तों को मिलेगा दो दिन अतिरिक्त पूजा का अवसर
12 दिनों तक गणपति के विराजमान रहने से श्रद्धालुओं को बप्पा की पूजा-अर्चना और सेवा के लिए दो अतिरिक्त दिन मिलेंगे। घरों के साथ-साथ सार्वजनिक गणेश पंडालों में भी इस लंबे उत्सव को लेकर विशेष तैयारियां किए जाने की संभावना है।
गौरी-गणपति पूजा भी रहेगी विशेष
इस वर्ष गणेशोत्सव के दौरान गौरी अथवा महालक्ष्मी पूजन की तिथियों का भी विशेष महत्व रहेगा। गणपति स्थापना और गौरी पूजा के बीच बनने वाला तिथिगत तालमेल धार्मिक दृष्टि से शुभ माना जा रहा है। ऐसे में 2026 का गणेशोत्सव श्रद्धालुओं के लिए धार्मिक आस्था और उत्सव के लिहाज से विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगा।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गणपति उत्सव के दौरान भगवान गणेश की विधि-विधान से पूजा करने, आरती करने और प्रसाद अर्पित करने से सुख-समृद्धि और विघ्नों के नाश की कामना की जाती है। इस बार 12 दिनों तक चलने वाला उत्सव भक्तों को बप्पा की आराधना के लिए अतिरिक्त अवसर प्रदान करेगा।
