वन क्षेत्रों में निर्माण कार्य ठेकेदारों से कराने पर जताया विरोध, मुख्यमंत्री सहित तीन मंत्रियों को पत्र लिखकर व्यवस्था बदलने की मांग
रायपुर। छत्तीसगढ़ के वन विभाग में ठेका पद्धति को लेकर विरोध के स्वर तेज होने लगे हैं। छत्तीसगढ़ वन कर्मचारी संघ ने वन क्षेत्रों में सिविल निर्माण एवं अन्य विभागीय कार्य ठेकेदारों के माध्यम से कराए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई है। संघ का कहना है कि इस व्यवस्था से मैदानी वन कर्मचारियों के अधिकार, जिम्मेदारियां और पारंपरिक कार्यक्षेत्र प्रभावित हो सकते हैं। संगठन ने शासन से ठेका पद्धति पर तत्काल रोक लगाने की मांग करते हुए मांगें पूरी नहीं होने पर चरणबद्ध आंदोलन की चेतावनी दी है।
संघ ने इस संबंध में मुख्यमंत्री, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री और वित्त मंत्री को पत्र भेजकर मौजूदा व्यवस्था पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है। संगठन का तर्क है कि वन क्षेत्रों की जमीनी परिस्थितियों, भौगोलिक चुनौतियों और स्थानीय आवश्यकताओं की सबसे बेहतर जानकारी मैदानी वन कर्मचारियों को होती है। ऐसे में वन क्षेत्रों के भीतर होने वाले निर्माण और अन्य विभागीय कार्य विभागीय अमले के माध्यम से कराए जाने चाहिए।
मैदानी कर्मचारियों की भूमिका सीमित करने पर आपत्ति
वन कर्मचारी संघ के मुताबिक, मैदानी कर्मचारी कठिन परिस्थितियों में वन एवं वन्यप्राणियों की सुरक्षा, संरक्षण और विभागीय जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हैं। ऐसे में ठेका पद्धति के विस्तार से उनकी भूमिका और कार्यक्षेत्र प्रभावित होने की आशंका है। संघ ने कर्मचारियों के अधिकार एवं दायित्व सीमित करने वाले किसी भी प्रस्ताव या निर्णय पर रोक लगाने की मांग की है।
गुणवत्ता में गड़बड़ी हुई तो कौन होगा जिम्मेदार?
संघ ने ठेके के माध्यम से कराए जाने वाले कार्यों की गुणवत्ता, तकनीकी मानकों और जवाबदेही सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया है। संगठन की मांग है कि निर्माण कार्यों में खामियां मिलने पर संबंधित ठेकेदार और सक्षम अधिकारी की जिम्मेदारी स्पष्ट रूप से तय की जाए। साथ ही विभागीय कर्मचारियों को पर्याप्त संसाधन, अधिकार और स्वतंत्र रूप से काम करने का अवसर दिया जाए।
अजित दुबे बोले—वन संरक्षण के लिए मजबूत मैदानी अमला जरूरी
संघ के प्रदेश अध्यक्ष अजित दुबे ने कहा कि वन एवं वन्यप्राणियों का संरक्षण केवल कागजी प्रक्रिया से संभव नहीं है। इसके लिए मजबूत, सक्षम और जिम्मेदार मैदानी अमले की आवश्यकता है। उन्होंने शासन से वन विभाग की जमीनी जरूरतों और कर्मचारियों की भूमिका को ध्यान में रखकर निर्णय लेने की अपील की।
संघ ने स्पष्ट किया है कि यदि मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया और ठेका पद्धति के साथ कर्मचारियों के अधिकारों से जुड़े मुद्दों का समाधान नहीं हुआ, तो संगठन लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से चरणबद्ध आंदोलन शुरू करेगा। अब देखना होगा कि शासन कर्मचारी संघ की मांगों पर क्या रुख अपनाता है।
