RTI में सामने आए आंकड़ों के आधार पर रेलवे की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल, ट्रेनों की बहाली और यात्रियों के लिए वैकल्पिक परिवहन की मांग
रायपुर, 16 अक्टूबर। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) में यात्री ट्रेनों के लगातार निरस्तीकरण और दैनिक यात्रियों को होने वाली परेशानियों को लेकर वरिष्ठ अधिवक्ता एवं समाजसेवी मनोज सिंह ठाकुर ने रेलवे प्रशासन पर सवाल उठाए हैं। सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम के तहत प्राप्त दस्तावेजों का हवाला देते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि रेलवे माल ढुलाई से हजारों करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित कर रहा है, लेकिन यात्री ट्रेनों के निरस्त होने पर प्रभावित लोगों के लिए वैकल्पिक परिवहन की व्यवस्था नहीं की जा रही है।
मनोज सिंह ठाकुर ने रेलवे से यात्री सुविधाओं को प्राथमिकता देने, निरस्त ट्रेनों को बहाल करने और प्रभावित यात्रियों को राहत उपलब्ध कराने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी कि मांगों पर कार्रवाई नहीं होने पर जनआंदोलन किया जाएगा और जरूरत पड़ने पर उच्च न्यायालय में जनहित याचिका (PIL) दायर की जाएगी।
माल ढुलाई से बढ़ा राजस्व, यात्री किराये की कमाई भी बढ़ी
मनोज सिंह ठाकुर द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे की माल ढुलाई से होने वाली कमाई पिछले कुछ वर्षों में बढ़ी है। उन्होंने यात्री किराये से प्राप्त राजस्व की तुलना करते हुए रेलवे की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाए हैं।
उनके मुताबिक, वित्तीय वर्षों के दौरान माल ढुलाई और यात्री किराये से प्राप्त राजस्व इस प्रकार रहा:
- 2022-23: माल ढुलाई से 26,581.30 करोड़ रुपये और यात्री किराये से 1,131.92 करोड़ रुपये।
- 2023-24: माल ढुलाई से 27,794.61 करोड़ रुपये और यात्री किराये से 1,280.73 करोड़ रुपये।
- 2024-25: माल ढुलाई से 29,372.43 करोड़ रुपये और यात्री किराये से 1,330.70 करोड़ रुपये।
- 2025-26: माल ढुलाई से 30,410.30 करोड़ रुपये और यात्री किराये से 1,417.95 करोड़ रुपये।
- 2026-27: अगस्त 2026 तक माल ढुलाई से 13,105.74 करोड़ रुपये का राजस्व दर्ज होने का दावा किया गया है।
ठाकुर ने सवाल उठाया कि जब रेलवे का माल ढुलाई राजस्व लगातार बढ़ रहा है, तो उसी क्षेत्र के यात्रियों को नियमित और सुविधाजनक रेल सेवाएं उपलब्ध कराने में परेशानी क्यों हो रही है। उनका कहना है कि मालगाड़ियों के परिचालन को प्राथमिकता देने के कारण यात्री ट्रेनों के संचालन पर पड़ने वाले प्रभाव की समीक्षा की जानी चाहिए।
RTI जवाब में वैकल्पिक व्यवस्था नहीं होने की जानकारी
मनोज सिंह ठाकुर के अनुसार, RTI आवेदन के बिंदु क्रमांक चार के जवाब में रेलवे ने प्रभावित दैनिक यात्रियों के लिए अलग से वैकल्पिक यात्रा व्यवस्था उपलब्ध नहीं कराने की जानकारी दी है। जवाब में अंग्रेजी में कहा गया है, “No separate alternative travel arrangements are provided for affected daily commuters.”
इसका आशय है कि प्रभावित दैनिक यात्रियों के लिए अलग से वैकल्पिक यात्रा व्यवस्था उपलब्ध नहीं कराई जाती।
ठाकुर ने कहा कि पैसेंजर और मेमू ट्रेनों के अचानक निरस्त होने से नौकरीपेशा लोगों, विद्यार्थियों, छोटे व्यापारियों और अन्य दैनिक यात्रियों को परेशानी उठानी पड़ती है। कई यात्रियों को मजबूरी में निजी बसों और टैक्सियों का सहारा लेना पड़ता है, जिससे उनका यात्रा खर्च बढ़ जाता है।
उन्होंने मांग की कि जिन रूटों पर यात्री ट्रेनें निरस्त की जाती हैं, वहां यात्रियों की जरूरत के अनुसार वैकल्पिक परिवहन की व्यवस्था पर विचार किया जाए।
ट्रेनों के निरस्तीकरण के आंकड़ों को लेकर भी सवाल
ठाकुर ने आरोप लगाया कि वर्ष 2023 से 2026 तक निरस्त की गई ट्रेनों की कुल संख्या और उनके निरस्तीकरण के कारणों की जानकारी मांगने पर संबंधित रेलवे विभागों के बीच जवाबदेही स्पष्ट नहीं हुई। उनके अनुसार, वाणिज्य विभाग ने इस विषय को परिचालन विभाग से संबंधित बताया है।
उन्होंने रेलवे प्रशासन से मांग की कि निरस्त की गई ट्रेनों की वर्षवार जानकारी सार्वजनिक की जाए। साथ ही, प्रत्येक निरस्तीकरण के कारण, प्रभावित रूट और सेवाओं की बहाली से संबंधित स्थिति स्पष्ट की जाए, ताकि यात्रियों को समय रहते जानकारी मिल सके।
रेलवे प्रशासन के सामने रखीं तीन प्रमुख मांगें
मनोज सिंह ठाकुर ने रेलवे प्रशासन से यात्री ट्रेनों को निरस्त करने या विलंबित करने से यात्रियों पर पड़ने वाले प्रभाव की समीक्षा करने की मांग की है। उनकी प्रमुख मांगें हैं:
- स्थानीय और पैसेंजर ट्रेनों के निरस्तीकरण तथा विलंब की समस्या का समाधान किया जाए।
- प्रभावित दैनिक यात्रियों के लिए जरूरत के अनुसार वैकल्पिक परिवहन की व्यवस्था की जाए।
- निरस्त ट्रेनों के आंकड़े, कारण और बहाली की समय-सीमा से संबंधित जानकारी पारदर्शी तरीके से उपलब्ध कराई जाए।
उन्होंने कहा कि यात्रियों को सुविधाजनक, किफायती और समयबद्ध परिवहन उपलब्ध कराना जरूरी है। यदि रेलवे प्रशासन ने उनकी मांगों पर उचित कार्रवाई नहीं की, तो वे आम नागरिकों और दैनिक यात्रियों को साथ लेकर आंदोलन करेंगे तथा उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर करने का विकल्प अपनाएंगे।
