लिपिकों की हड़ताल से कलेक्टोरेट सहित सभी कार्यालयों में काम काज ठप, आक्रोशीत लिपिक सड़क पर बैठे

** अपर कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन।

वसीम बारी, रामानुजगंज / छत्तीसगढ़ प्रदेश लिपिक वर्गीय शासकीय कर्मचारी संघ के आह्वान पर बलरामपुर जिले के समस्त लिपिक दो दिवस के सामूहिक अवकाश लेकर हड़ताल पर हैं। लिपिकों की हड़ताल से कलेक्ट्रेट सहित सभी कार्यालयों में काम काज पूरी तरह बंद रहा। आज जिले भर क़े लिपिको ने साप्ताहिक बाजार से कलेक्ट्रेट तक रैली निकालकर मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा।

आक्रोशित लिपिक सड़क पर बैठे –
लिपिकों की रैली को पुलिस के जवानों ने बेरिकेट्स लगाकर कलेक्ट्रेट से 100 मीटर दूर ही रोक लिया। पुलिस का कहना था कि इसके आगे केवल कुछ प्रतिनिधि जाकर ज्ञापन सौंप दे। इस बात का जिलाध्यक्ष रमेश तिवारी ने कड़ा विरोध किया। उनका कहना था कि पूर्व की भाँति उन्हें कलेक्ट्रेट तक जाने दिया जाये। परन्तु पुलिस के अधिकारी श्री ध्रुव के द्वारा मना करने पर सभी लिपिक सड़क पर ही बैठकर विरोध करने लगे। उन्होंने आगे नही जाने तथा वहीं तक कलेक्टर को बुलाने के लिये नारेबाजी शुरू कर दिया।

अपर कलेक्टर ने लिया ज्ञापन –
कलेक्टर की अनुपस्थिति में अपर कलेक्टर श्री वी.के. कुजूर ज्ञापन लेने लिपिकों में पास पहुँचे। लिपिक संघ के जिलाध्यक्ष श्री रमेश तिवारी ने कलेक्ट्रेट से इतनी दूर रैली रोकने पर कड़ा ऐतराज़ जताते हुये कलेक्ट्रेट तक रैली ले जाकर ज्ञापन देने का अनुरोध किया। अपर कलेक्टर श्री कुजूर ने इस पर सहमति दिया और सभी लिपिक बेरिकेट्स हटाकर कलेक्ट्रेट कार्यालय तक पहुँचे। भारी गहमा गहमी और नारेबाजी के बीच अपर कलेक्टर श्री वी.के. कुजूर को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया।

हमारी माँगे जायज़ – रमेश
लिपिक नेता श्री रमेश तिवारी ने बताया कि हमारी माँगे जायज़ हैं, विगत 37वर्षों से लिपिकों के वेतन में विसंगति है, जिसे दूर करने के लिए कई आंदोलन हुये हैं। 2013 में चुनाव के पूर्व भाजपा के संकल्प पत्र में भी वेतन विसंगति दूर करने का वादा किया गया था, परन्तु आज तक कोई कार्यवाही नही की गई है। ऐसे में कर्मचारियों में भाजपा सरकार के प्रति अविश्वास की स्थिति बन गयी है। चुनाव नजदीक है, यदि समय रहते कर्मचारियों की समस्या दूर नही की गई, तो यह सरकार के लिये महंगा साबित हो सकता है। यदि 15 अगस्त तक लिपिकों की माँग पूरी नही हुई तो उसके बाद प्रदेश भर के लिपिक सारे कार्यालय बन्द कर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जायेंगे, जिसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी शासन प्रशासन की होगी।

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