कोरिया / बर्खास्तगी के बाद नौकरी पर लौटे प्रभारी DFO वनमण्डल बलरामपुर लक्ष्मण सिंह पर आरोप है कि उन्होंने वर्षो से कोरिया वनमण्डल अंतर्गत शासकीय आवास को तोड़ कर बंगले जैसा निर्माण कर अपने कब्जे में ले लिया है, विभागीय मामला होने के नाते कोरिया वन मण्डल के अधिकारी भी सन्न मारे बैठे है। जिस शासकीय आवास को तोड़कर इन्होंने बंगला बनाया है उस भवन का न तो अनुज्ञा है और नही NOC, ऐसे में बड़ा सवाल यह उठता हैं कि क्या कोरिया वनमण्डल के अधिकारी उक्त वर्षो से कब्जे वाली शासकीय आवास को प्रभारी डीएफओ के कब्जे से मुक्त करा पाते है या नही ?

गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े वनमण्डल बलरामपुर के वर्तमान प्रभारी डीएफओ लक्ष्मण सिंह को इसके पूर्व उप वनमण्डल अधिकारी कोरिया में पदस्थाना के दौरान छत्तीसगढ़ सरकार ने इन्हें नौकरी से बर्खास्त कर दिया था। बर्खास्तगी के पूर्व कोरिया वनमण्डल बैकुंठपुर में शासकीय सेवा के दौरान इन्होंने मिशन रोड स्कुलपारा बैकुंठपुर स्थित परिक्षेत्र कार्यालय उत्पादन और एक दो शासकीय आवास को तोड़कर एक बंगले का निर्माण कराकर अपना स्थाई निवास बना लिया था। शासकीय सेवा से बर्खास्त होने के पश्चात भी इन्होंने बराबर उस बंगले में कब्जा जमाए रखा। यह सब देखकर भी कोरिया वन मण्डल के जिम्मेदार अधिकारियों की मजाल नही की शासकीय आवास में कब्जा किये बर्खास्त अधिकरी को खाली करने कहे या कोई पत्राचार करें। अब जब इनकी बहाली हो चुकी है और वर्तमान छत्तीसगढ़ सरकार ने पूर्व सरकार द्वारा इनके बर्खास्तगी करने पर तरस खाते हुए ऐसे काबिल अफसर को उप वनमंडलाधिकारी वनोपज से सीधे वनमंडलाधिकारी के कुर्सी पर आसीन कर दिया है वह भी तब जब छत्तीसगढ़ में IFS अफसरों की कोई कमी नहीं है।

आपको बता दे कि प्रभारी DFO लक्ष्मण सिंह द्वारा बैकुंठपुर स्थित वन विभाग के शासकीय आवास में कब्जा किए कई वर्ष हो गए है। जानकारी के मुताबिक वर्तमान में इन्हें वनमंडलाधिकारी के रूप में बलरामपुर में शासकीय बंगला अलाट हुआ है इसके बाद भी बैकुंठपुर कब्जे वाले शासकीय आवास में हर हप्ते इनका आना जाना लगा रहता है। वन विभाग के अधिकारी ही जब शासकीय भवन में अवैध कब्जा कर लेंगे तो अशीनस्थ कर्मचारियों पर क्या संदेश जाएगा इस बात की चिंता शायद वन विभाग के उच्च अधिकारियों को तनिक भी नही है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जिस शासकीय आवास को तोड़कर इन्होंने बंगला बनाया है उस भवन का न तो अनुज्ञा है और नही NOC । फिर भी अपनी धौस पर नियम विरुद्ध ढंग से पक्के का मकान खड़ा कर दिया गया है और मामला वर्षो से ठंडे बस्ते में पड़ा है। अब देखना यह है की क्या कोरिया वनमण्डल के अधिकारी उक्त वर्षो से कब्जे वाली शासकीय आवास को प्रभारी डीएफओ के कब्जे से मुक्त करा पाते है या नही।
शासकीय वाहन का हो रहा दुरूपयोग
छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े वनमण्डल बलरामपुर के वर्तमान प्रभारी डीएफओ लक्ष्मण सिंह अपने शासकीय वाहन का दुरुपयोग भी बैखोफ कर रहे हैं या यूं कहें कि शासकीय वाहन का निजी हित के लिए उपयोग कर रहे हैं बलरामपुर के वर्तमान प्रभारी डीएफओ तो गलत न होगा। नियमों के मुताबिक सरकारी वाहन इस्तेमाल करने की किसी भी अधिकारी को अनुमति नहीं है, लेकिन ये बेखौफ इस्तेमाल कर रहे हैं। बलरामपुर से लगातार कोरिया आने जाने से शासकीय धन का दुरुपयोग हो रहा है और सरकार के ऊपर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।


