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रजिस्ट्रार पर लगा पैसे लेकर रजिस्ट्री करने का आरोप, युवक ने मीडिया और रजिस्ट्रार के सामने कहा मुझसे पैसे लिए, रजिस्ट्रार दुबे पलटे कहा नही दिया…

00 जमीन खरीदी ब्रिकी मामले में चल रही जमकर धांधली।
00 रजिस्ट्री कराने में निर्धारित शुल्क से ज्यादा पैसा लेने का आरोप।
00 रजिस्ट्रार पर लगा पैसे लेकर रजिस्ट्री करने का आरोप।
00 पहले रजिस्ट्रार ने रजिस्ट्री करने से किया इंकार फिर डिमांड केे बाद किया काम ।
00 उपपंजीयक कार्यालय से लेकर तहसील कार्यालय तक दलालों का है बोलबाला।
00 जमीन खरीदी-ब्रिकी के मामले में उप पंजीयक कार्यालय से लेकर तहसील कार्यालय तक दिख रही अनिमियता।

कोरिया बैकुण्ठपुर / पुलिस अधीक्षक कार्यालय के बगल में स्थित और तहसील से लगा उपपंजीयक कार्यालय में आये दिन जमीन खरीदी-ब्रिकी में पैसे लेने की शिकायतें आम हो चली है। रजिस्ट्रार कार्यालय के बाहर जमीन की रजिस्ट्री कराने वालों की भींड लगी रहती है। जमीन के दलालों के माध्यम से रजिस्ट्रार पर अतिरिक्त पैसा लेने का आरोप लग रहे है ऐसा ही एक ताजा मामला सामने आया है जिसमें 11 नवम्बर को एक रजिस्ट्री में रजिस्ट्रार ने पैसे लेकर रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी की।

हद तो तब हो गयी जब मिडियाकर्मी उप पंजीयक कार्यालय पहुंचे और उन पर लगे आरोप के बारे में उनसे पूछा तो उन्होंने साफ इंकार किया उसी दौरान प्रार्थी आषीष सोनी उनके समझ कैमरे के सामने पैसे लेने का आरोप लगाया तब उप पंजीयक की बोलती बंद हो गयी और पैसे लेने के आरोप सीधे खारिज कर दिया। वहां पर मौजुद लोगों की भींड लग गयी और उन लोगों ने भी कहा कि रजिस्ट्री कराने में अतिरिक्त पैसा देना ही पड़ता है नही तो रजिस्ट्री के लिये घूमना पड़ता है।

मिली जानकारी के अनुसार मामला 11 नवम्बर 2020 का है जहां विक्रेता पटना क्षेत्र के करजी गावं की एक जमीन का सौदा किया और दो लोगों को बेचा जिसकी रजिस्ट्री के लिये उप पंजीयक कार्यालय में रजिस्ट्री की सारी प्रक्रिया अर्जी नवीस ने पूरी किया और जैसे ही रजिस्ट्रार के समझ क्रेता विक्रेता उपस्थित हुये और आॅनलाईन सम्बन्धित सारी प्रक्रिया कर ली गयी। आखरी डिजिटल हस्ताक्षर के दौरान उप पंजीयक ने यह कहा कि रजिस्ट्री नहीं होगी क्योंकि इसमें आपत्ति लगी हुयी है। जिस पर आपत्ति लगाने वाला व्यक्ति वहां मौजुद था, क्योंकि वह खुद क्रेता था उसने कहा कि महोदय मैंने सीमांकन होने तक इस रजिस्ट्री पर रोक लगाने को कहा था पर सीमांकन की प्रक्रिया पूरी हो गयी है और मैं सीमांकन से संतुष्ट होकर खुद क्रेता भी हूं। इसलिये मैं अपनी आपत्ति वापस लेता हूं और यदि आपकों मेरे द्वारा कोई लिखितत दस्तावेज चाहिऐ तो वह भी देने को तैयार हूं क्योंकि रजिस्ट्री आज कराना जरूरी है क्योंकि मैंने सारे पैसे विक्रेता को दे दिया है और आगामी पांच दिनों की छुट्टी है और विक्रेता पांच सौ किमी दूर से आया है जिससे रजिस्ट्री में विलंब हो जायेगी। तब रजिस्ट्रार ने कहा कि रजिस्ट्री नहीं हो पायेगी क्योंकि यह लेटर कलेक्टर के यहां से आया है और इसमें मुझे जवाब देना पड़ेगा। मैंने उनसे निवेदन किया कि सर रजिस्ट्री काफी जरूरी है इसे आज पूरा ही कर देवें। मेरे मजबूरी को देखते हुये रजिस्ट्रार ने अर्जी नवीस तेजबली व महोबिया के माध्यम से यह सूचना दिलायी की रजिस्ट्री तो मैं पूरा कर दूंगा पर इसके एवज में एक पार्टी से 50 हजार चाहिऐ। मैंने काफी उनसे निवेदन किया पर उन्होंने नहीं माना अंततः मुझे दबाव पूर्वक उन्हें पैसे देने पड़े और देने के बाद मुझसे वही काम कराया गया जो मै पहले बोल रहा था मुझसे इस बात का शपथ पत्र लिया गया, कि मेरे द्वारा लगायी गयी आपत्ति वापस लेता हूं और सीमांकन की प्रक्रिया पूरी हो गयी है। तब मैंने उनसे कहा कि सर मुझसे यही कराना था तो आपने मुझे परेषान क्यों किया और मेरे से इतने पैसे क्यों लिये। जब आप मेरे से पैसे ले सकते है तो आप इस तरह का प्रोपेगेंड़ा कर कितने लोगों से पैसे लेते होंगें।

जमीन दलालों के साथ अर्जी नवीस, स्टांप विक्रेता, लेखक जमीन सम्बन्धित खुलेआम कर रहे दलाली – उपपंजीयक के कार्यालय में आये प्रार्थीयों की बात न सुन वहां पर रोजमर्रा में इसी काम में लगे लोगों की बातो को ज्यादा तवज्जों देते है। तहसील में जब से आॅनलाईन की प्रक्रिया शुरू हुयी है तब से अर्जी नवीसों के साथ स्टांप वेंडर व टाईपिस्टों के काम में कमी आयी है। फिर भी वह दिनों दिन काफी तेजी से फलफूल रहे है? क्योंकि इनका सीधा सम्पर्क रजिस्ट्रार से होता है और क्रेता व विक्रेता को परेशान कर अवैध तरीके से पैसा बनाने की नीति में दिनों दिन बढ़ोत्तरी हो रही है। स्टांप वेडर भी महज कमीशन में काम न करके खुलेआम तय रकम से ज्यादा में स्टांप बेचने का धंधा करते देखा जा सकता है।

बैकुण्ठपुर विधानसभा में चल रहा जमीन का गोरखधंधा – उपपंजीयक कार्यालय से लेकर तहसील कार्यालय में जमीन के दलाल सक्रिय है और जमीन का गोरखधंधा जमकर चला रहे है। यही वजह है कि उप पंजीयक कार्यालय से लेकर तहसील कार्यालय तक पीड़ित के अलावा दलालों की भींड लगी रहती है। कहीं की जमीन किसी के नाम हो जाती है या फिर कहीं आदिवासी की जमीन जनरल खरीद लेता है। यहां तक कि नजुल की जमीन से लेकर मुआवजा प्राप्त जमीन पर भी खरीदी-ब्रिकी के मामले सामने आने लगे है। फौती व नामांतरण जैसे कई मामले थाने में भी पहुंच रहे है जिसमें प्रार्थी को पता ही नहीं है और उनके जमीनों की फौती व नामांतरण दूसरे के नाम पर हो जा रहे है। शासकीय जमीन निजी व्यक्ति के नाम पर चढ़ जा रहे है तो कही एक ही जमीन को कई बार विक्रय कर दिया जा रहा है। सिर्फ ईष्तिहार छाप कर कई जमीनों में हेरा फेरी का खेल चल रहा है।

कैसे लगेगा इस सब पर रोक – जमीन के कार्याे में जिस प्रकार की धांधली चल रही है इससे पूर्व सरकार से लेकर वर्तमान सरकार पर सवाल उठना लाजमी है। आखिर कोई तो ऐसा नियम बनाये ताकि लोग परेशान न हो जिससे अधिकारीयों मनमानी खत्म हो और जमीन की खरीद ब्रिकी कारोबार में आने लगी है और यह अब बड़े पैमाने पर शुरू हो गया है। जिसे लेकर राजस्व विभाग, पंजीयक कार्यालय में जमकर पैसे का लेनदेन हो रहा है। एक समय हुआ करता था जब तहसील कार्यालयों में भींड न के बराबर होती थी और पंजीयक कार्यालय में कई – कई महिनों तक कोई रजिस्ट्री कराने नहीं आया करता था पर आज कि स्थिति में इन दोनों कार्यालयों में भींड देखने को मिलेगी ऐसा लगता है कि सबसे ज्यादा काम इन्हीं कार्यालयों में है।

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