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पोस्टल विभाग को भेजा सुझााव तो आया जबाब – सुधारात्मक प्रयास किए जा रहे हैं

कोरिया / चिरमिरी निवासी आरटीआई कार्यकत्र्ता राजकुमार मिश्रा ने भारत सरकार के पोस्टल विभाग को एक पत्र लिखकर सुझाव दिया गया है। आरटीआई कार्यकत्र्ता के इस पत्र का पोस्टल विभाग द्वारा संज्ञान लेकर उसके अनुरूप कार्यवाही करने का लिखित आस्वाशन मिला है।

पत्र में लिखा है की मैं आरटीआई कार्यकत्र्ता हॅू, आरटीआई व हाई कोर्ट में जनहित याचिकाओं के माध्यम से देश से अराजकता व भ्रष्ट्राचार दूर करने का अथक व अनवरत प्रयास कर रहा हॅू। रजिस्टर्ड डाक का एडी (पावती) भले ही वो पोस्टकार्ड क्यों ना हो वापस नही आता था। यह जानने में बडी परेशानी होती थी कि रजिस्टर्ड डाक पाने वाले को मिला या नही। मेरे पास एैसा कोई साधन नही था कि मैं यह सिद्ध करता कि किस दिनांक को मेरा डाक पाने वाले को मिला है। कुछ दिनों पहले पता चला कि इंडियन पोस्ट के वेबसाईट पर नेट टैकिंग के माध्यम से यह पता चल जाता है कि मेरा अमुक डाक कब प्राप्त हुआ और मैं अब इसकी इंटरनेट से पावती भी निकाल लेता हॅू।

रजिस्टर्ड डाक का जो पावती नेट में दिखता है और पिंट निकलता है उसके सबसे निचले हिस्से में Article Booked लिखा होता है, इस शब्द के आगेे भेजने वाले (प्रेषक) का नाम व सबसे उपरी हिस्से में जहां Article Delivered लिखा होता है।

आरटीआई कार्यकत्र्ता के इस पत्र के जबाव में भारतीय डाक विभाग के रायगढ़ संभाग के डाक अधीक्षक के द्वारा दिनांक 18.07.2016 को पत्र लिखा गया कि आपके द्वारा रजिस्टर्ड पत्र के प्रेषक तथा वितरण के संबंध में प्रेषक एवं प्राप्त कत्र्ता के नाम को इंडिया पोस्ट की वेबसाईट में दर्ज करने संबंधी जो सुझााव दिया गया है जिसे यह अत्यंत महत्वपूर्ण मानते है। भारतीय डाक विभाग द्वारा इंडिया पोस्ट की वेबसाईट में लगातार सुधारात्मक प्रयास किए जा रहे हैं। जिससे भविष्य में और भी बेहतर सेवाएं प्राप्त हो सकेंगी।

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