नल्लामल्ला के जंगलों में नक्सलियों की गुप्त बैठक!
दंतेवाड़ा, (विशेष रिपोर्ट)
बस्तर में लगातार कमजोर पड़ रहे नक्सलियों ने अब नई चाल चल दी है। खुफिया सूत्रों के अनुसार, नक्सली टॉप लीडर्स की बड़ी गुप्त बैठक तेलंगाना और आंध्रप्रदेश की सीमा पर नल्लामल्ला टाइगर रिजर्व के बीच हुई है।
दुर्गम पहाड़ियों और घने जंगलों के बीच बने अस्थायी कैंप में यह मीटिंग करीब दो दिनों तक चली, जिसमें दक्षिण बस्तर के खूंखार नक्सली हिड़मा, देवा, देवजी, केसा और दामोदर समेत कई बड़े लीडर मौजूद रहे।
सूत्रों का दावा है — इस बैठक में संगठन के नई सेंट्रल कमेटी और मिलिट्री कमीशन के गठन पर बड़ा फैसला लिया गया है।
नक्सली संगठन में बड़ा फेरबदल
थिप्पिरी तिरुपति उर्फ देवजी — नया सेंट्रल कमेटी प्रमुख
हिड़मा — मिलिट्री कमीशन प्रमुख
देवा — बटालियन कमांडर
दामोदर — दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी इंचार्ज
गणेश उइके — पोलित ब्यूरो सदस्य
यह बदलाव इस संकेत की ओर इशारा करता है कि संगठन अब बस्तर की जगह दक्षिण भारत को सुरक्षित अड्डा बनाने की तैयारी में है।
संगठन में हड़कंप — 22 महीनों में 448 नक्सली ढेर, 2274 ने किया सरेंडर
पिछले 22 महीनों में सुरक्षा बलों ने नक्सलियों के खिलाफ बड़ी सफलता हासिल की है।
209 मुठभेड़ों में 448 नक्सली ढेर,
2274 नक्सली आत्मसमर्पण,
शीर्ष नक्सली गगन्ना उर्फ बासवराजू, चलपति, कोसा, बालकृष्ण समेत कई कुख्यात कमांडर मारे गए।
अब संगठन की मिलिट्री बटालियन नंबर 1 में करीब 300 सशस्त्र नक्सली ही बचे हैं। पहले इसका कमांड हिड़मा के पास था, लेकिन अब देवा को बटालियन की जिम्मेदारी दी गई है।
छत्तीसगढ़ अब ‘सुरक्षित ठिकाना’ नहीं — इसलिए नल्लामल्ला पहुँचे नक्सली
बस्तर, सुकमा और बीजापुर के जंगल अब फोर्स के नियंत्रण में हैं। यही वजह है कि नक्सली अब तेलंगाना-आंध्र की सीमा पर स्थित नल्लामल्ला टाइगर रिजर्व जैसे कठिन इलाकों में अपनी बैठकें करने लगे हैं।
सूत्रों का कहना है कि यह क्षेत्र घना, पहाड़ी और कम आबादी वाला है — जहाँ फोर्स की पहुँच मुश्किल है।
क्यों यह बैठक अहम है
पहली बार सेंट्रल कमेटी और मिलिट्री लीडरशिप का बड़ा फेरबदल।
संकेत कि अब नक्सल मूवमेंट का केंद्र बस्तर से बाहर शिफ्ट हो सकता है।
नेतृत्व संकट और लगातार आत्मसमर्पण से जूझ रहे नक्सली अब नई रणनीति पर काम कर रहे हैं।
लगातार सुरक्षा अभियानों और आत्मसमर्पण की लहर के बीच अब नक्सली संगठन पूरी तरह नेतृत्व संकट में है। बस्तर में पैर उखड़ने के बाद, नक्सली अब नल्लामल्ला के जंगलों में नई ताकत जुटाने की कोशिश में हैं — लेकिन सुरक्षा एजेंसियां इसे ‘अंतिम हिचकोला’ मान रही हैं।
