अंबिकापुर। जनजातीय गौरव दिवस के राज्य स्तरीय कार्यक्रम ने बुधवार को अंबिकापुर को ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बना दिया। पूरे शहर में आदिवासी संस्कृति की भव्य झांकी, पारंपरिक परिधानों में सजी सैकड़ों महिलाएँ, ढोल-नगाड़ों की थाप और जनजातीय नृत्यों की रंगत ने माहौल को उत्सव में बदल दिया।
इसी सांस्कृतिक गरिमा के बीच महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू मंच पर पहुंचीं, तो पूरा पंडाल “जय जोहार” की गूंज से भर उठा। मंच पर राज्यपाल रमेन डेका, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू, मंत्री रामविचार नेताम, पूर्व मंत्री केदार कश्यप, विधायक ओपी चौधरी और सांसद चिंतामणि महाराज मौजूद रहे।
राष्ट्रपति का प्रचंड भाषण— सांस्कृतिक गौरव, परंपरा और संघर्ष का संगम
“मैं इस समाज की बेटी हूं… आदिवासी संस्कृति भारत की आत्मा है”
राष्ट्रपति मुर्मू ने सरगुजिया बोली में अभिवादन कर जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने कहा—
“छत्तीसगढ़ आकर मुझे अपने घर जैसा महसूस होता है। मैं इसी समाज से निकली हूं। आदिवासी समाज की परंपराएं भारत की सबसे समृद्ध धरोहर हैं। इन्हें जीवित रखना हम सबकी जिम्मेदारी है।”
बिरसा मुंडा का जिक्र— बोले, ‘उन्होंने अंग्रेजों का जीना हराम कर दिया था’
राष्ट्रपति ने उलगुलान की गाथा छेड़ते हुए कहा—
“बिरसा मुंडा ने सिर्फ विद्रोह नहीं किया, बल्कि स्वाभिमान, भूमि अधिकार और स्वतंत्रता की ऐसी लड़ाई लड़ी जिसने अंग्रेजों का जीना हराम कर दिया था। आज के युवाओं को उनके साहस से प्रेरणा लेनी चाहिए।”
महिलाओं की भूमिका को बताया समाज की धुरी
राष्ट्रपति ने खास तौर पर आदिवासी महिलाओं की ताकत का उल्लेख करते हुए कहा—
“जंगलों, जल–जमीन और परंपराओं की रक्षा में आदिवासी महिलाएं हमेशा सबसे आगे रही हैं। वे सिर्फ परिवार नहीं, समाज और संस्कृति की प्रमुख वाहक हैं।”
सरकार की योजनाओं के केंद्र में है जनजातीय समाज— युवाओं को शिक्षा व तकनीक अपनाने की सलाह
उन्होंने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य, खेल और तकनीक में आदिवासी युवाओं को आगे बढ़ना होगा।
“देश तभी आगे बढ़ेगा जब आदिवासी समाज बराबर की भागीदारी निभाएगा।”
सीएम साय – ‘बस्तर में नक्सलवाद अंतिम सांसें ले रहा है’
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राष्ट्रपति मुर्मू का स्वागत करते हुए कहा—
छत्तीसगढ़ उनके आशीर्वाद से विकास की नई ऊंचाइयों पर है।
बस्तर में नक्सलवाद अब अपनी अंतिम सांसें ले रहा है।
सड़कों, पुलों, बिजली-पानी सहित सभी बुनियादी सुविधाओं में तेज़ी से काम हुआ है।
पीएम मोदी द्वारा शुरू की गई जनमन योजना में राज्य ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है।
सीएम ने बताया कि बीते दिनों नक्सल पीड़ितों ने राष्ट्रपति से मुलाकात की और सभी उनकी संवेदनशीलता से प्रभावित हुए।
राज्यपाल बोले— ‘छत्तीसगढ़ की नींव हैं इसकी जनजातियाँ’
राज्यपाल रमेन डेका ने कहा—
“यह राज्य वीरगाथाओं की मिट्टी है। छत्तीसगढ़ का मूल आधार जनजातीय समाज है, और यह राज्य गर्व करता है कि मुख्यमंत्री भी इसी समाज से आते हैं।”
मंत्री रामविचार नेताम – राष्ट्रपति का जीवन प्रेरणा का स्रोत
उन्होंने कहा—
पीएम मोदी की पहल से देशभर में जनजातीय गौरव दिवस मनाया जा रहा है।
राष्ट्रपति मुर्मू का जीवन कठिन परिस्थितियों में दृढ़ता और संयम का अनूठा उदाहरण है।
अंबिकापुर में दिखी जनजातीय परंपरा की अनूठी झलक
समारोह में उरांव, गोंड, पहाड़ी कोरवा, कन्वर, मंझी समाज सहित कई जनजातियों ने पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत किए।
मुख्य मंच पर पूरे कार्यक्रम में जनजातीय संगीत की मधुर धुनें गूंजती रहीं।
राष्ट्रपति का संदेश— ‘जल, जंगल, जमीन की रक्षा से ही भविष्य सुरक्षित’
उन्हीं के शब्दों में—
“आदिवासी जीवनशैली दुनिया को सिखाती है कि प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर कैसे जिया जाता है। आज जब दुनिया जलवायु संकट से जूझ रही है, आदिवासी समुदाय ही स्थायी समाधान की राह दिखाते हैं।”
अंबिकापुर ने रचा इतिहास, झलक उठा नया सांस्कृतिक आत्मविश्वास
जनजातीय गौरव दिवस का यह समारोह सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि आदिवासी अस्मिता, सांस्कृतिक गर्व और एक नए आत्मविश्वास का उत्सव बन गया।
अंबिकापुर की धरती पर राष्ट्रपति मुर्मू का संदेश लंबे समय तक गूंजता रहेगा—
“आदिवासी समाज आगे बढ़ेगा तो राष्ट्र आगे बढ़ेगा।”
