बीजापुर।
नक्सल प्रभावित इलाकों में सुरक्षा घेरा मजबूत करने और विकास कार्यों को गति देने के उद्देश्य से बीजापुर जिले के ताड़पाला क्षेत्र में कर्रेगुट्टा पहाड़ पर नवीन सुरक्षा एवं जन-सुविधा कैंप की स्थापना की गई है। दुर्गम पहाड़ी, लगातार IED खतरे और प्रतिकूल परिस्थितियों के बीच सुरक्षा बलों ने यह अभियान सफलतापूर्वक पूरा किया, जिसे नक्सल उन्मूलन अभियान की एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
वरिष्ठ अधिकारियों के सतत मार्गदर्शन और क्षेत्रीय निरीक्षण से जवानों का मनोबल ऊंचा हुआ है और ऑपरेशन की रफ्तार भी तेज हुई है।
‘नियद नेल्ला नार’ योजना के तहत जिले के दूरस्थ और संवेदनशील इलाकों में विकास कार्यों और सुरक्षा विस्तार को बढ़ावा देने के लिए प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों ने तेज कदम उठाए हैं।

सफलताओं का आंकड़ा मजबूत
वर्ष 2024 से अब तक बीजापुर जिले में 22 नए सुरक्षा कैंप स्थापित किए जा चुके हैं। इसी अवधि में सुरक्षा बलों की कार्रवाई और रणनीतिक दबाव के परिणामस्वरूप—
749 माओवादी आत्मसमर्पण,
202 माओवादी मारे गए,
1006 माओवादी गिरफ्तार किए गए हैं।
इसके अलावा पूरे बस्तर संभाग में 210 माओवादियों ने हथियारों सहित आत्मसमर्पण किया है। यह नक्सल उन्मूलन अभियान की बड़ी सामरिक कामयाबी मानी जा रही है।
ताड़पाला कैंप के बाद 14 IED बरामद
नए कैंप की स्थापना के बाद से ही सुरक्षा बलों ने इलाके में लगातार सर्च ऑपरेशन चलाए हैं। इसी दौरान 14 IED बरामद किए गए, जिन्हें बीडीएस टीम ने सुरक्षित रूप से नष्ट किया। इससे स्पष्ट है कि इलाके में नक्सलियों की सक्रियता कमजोर हुई है और सुरक्षा बलों की पकड़ मजबूत हुई है।
विकास की दिशा में बड़ा कदम
वर्ष 2023–24 और 2024–25 के दौरान बीजापुर जिले में कुल 44 नए सुरक्षा कैंप स्थापित हो चुके हैं। इन कैंपों के माध्यम से सुरक्षा के साथ-साथ स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क, बिजली और संचार जैसी बुनियादी सुविधाओं को भी अंदरूनी गांवों तक पहुँचाया जा रहा है।
स्थानीय लोगों का मानना है कि सुरक्षा कैंपों की स्थापना से अब क्षेत्र में विकास की रफ्तार तेज हुई है और नक्सलियों का भय घटने लगा है।
