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“बोल रहा अब हिंदुस्तान, मनखे–मनखे एक समान” – समानता और समरसता की ऐतिहासिक पदयात्रा


गुरु घासीदास बाबा के आशीर्वाद से विशाल सतनाम सद्भाव यात्रा का शुभारंभ


विष्णु देव साय की शुभकामनाओं के साथ यात्रा प्रारंभ


मंत्री गुरु खुशवंत साहेब के नेतृत्व में सामाजिक एकता का विराट अभियान


प्रथम दिवस 35 किमी यात्रा पूर्ण, सारागांव में रात्रि विश्राम


रायपुर/बलौदाबाजार।
परम् पूज्य गुरु घासीदास बाबा के पावन आशीर्वाद एवं राजागुरु धर्मगुरु गुरु बालदास साहेब जी के सानिध्य में सतनाम भवन, मोवा (रायपुर) से “बोल रहा अब हिंदुस्तान, मनखे–मनखे एक समान” के दिव्य संदेश के साथ विशाल सतनाम सद्भाव पदयात्रा का भव्य एवं ऐतिहासिक शुभारंभ हुआ। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की शुभकामनाओं के साथ प्रारंभ हुई यह पांच दिवसीय आध्यात्मिक एवं सामाजिक चेतना यात्रा राजधानी रायपुर से निकलकर परम पूज्य बाबा जी की जन्मभूमि गिरौदपुरी धाम तक पहुंचेगी।
यात्रा के प्रथम दिवस में लगभग 35 किलोमीटर की अनुशासित एवं सफल पदयात्रा पूर्ण की गई।

प्रथम दिवस का रात्रि विश्राम सारागांव में निर्धारित है।
राजधानी रायपुर समानता, श्रद्धा और सामाजिक एकता के अनुपम उत्सव की साक्षी बनी। सुसज्जित पंथी दलों की मनोहारी प्रस्तुतियां, अखाड़ा दलों का शौर्य प्रदर्शन, डीजे की लयबद्ध ध्वनि तथा “साहेब सतनाम” के गगनभेदी जयघोष से वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत हो उठा। जनसमूह के उत्साह एवं अनुशासन ने इस यात्रा को ऐतिहासिक स्वरूप प्रदान किया।
यात्रा के विभिन्न पड़ावों—विधानसभा, सेमरिया, दोंदेखुर्द एवं दोंदेकला सहित अन्य स्थानों पर सतनामी समाज, सर्व समाज, सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों, शिक्षण संस्थानों एवं गणमान्य नागरिकों द्वारा आत्मीय स्वागत एवं पुष्पवर्षा कर अभिनंदन किया गया। गांव–गांव में उमड़े जनसैलाब ने सामाजिक समरसता के इस अभियान को व्यापक जनसमर्थन प्रदान किया।


जगह–जगह हुआ भव्य स्वागत
कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब के नेतृत्व में निकली इस पदयात्रा का मार्गभर पुष्पवर्षा, गजमाला एवं आतिशबाजी के साथ भव्य स्वागत किया गया। पूरा मार्ग “साहेब सतनाम” एवं “जय सतनाम” के जयकारों से गुंजायमान रहा।


पंथी एवं अखाड़ा दलों ने बांधा समां
पंथी एवं सतनाम अखाड़ा दलों की पारंपरिक वेशभूषा, जोशपूर्ण नृत्य और आध्यात्मिक प्रस्तुतियों ने उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया। कलाकारों ने बाबा जी के समरसता एवं समानता के संदेश को जीवंत करते हुए सामाजिक एकता और सांस्कृतिक गौरव का अद्भुत प्रदर्शन किया।


संस्कृति संरक्षण का प्रेरक प्रयास
यात्रा के साथ आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक परंपराओं, लोकनृत्यों एवं लोकगीतों को सहेजने तथा नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रेरणादायी प्रयास किया जा रहा है। ऐसे आयोजन समाज में एकता, सद्भाव और सांस्कृतिक चेतना को सुदृढ़ करते हैं।


सुरक्षा एवं स्वास्थ्य की विशेष व्यवस्था
यात्रा के सुचारू संचालन हेतु पुलिस एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा विशेष प्रबंध किए गए हैं। सुरक्षा बल, चिकित्सा दल एवं एंबुलेंस सेवाएं निरंतर पदयात्रा के साथ संचालित हो रही हैं, जिससे आयोजन सुरक्षित एवं सुव्यवस्थित रूप से संपन्न हो रहा है।


इस अवसर पर मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने कहा—
“यह यात्रा केवल कदमों का संगम नहीं, बल्कि हृदयों का पवित्र मिलन है। ‘मनखे–मनखे एक समान’ का संदेश जन–जन तक पहुंचाकर सामाजिक समरसता, समानता और भाईचारे को सुदृढ़ करना हमारा संकल्प है। यह अभियान प्रदेश में नई चेतना और सकारात्मक परिवर्तन का सूत्रपात करेगा।”


इस ऐतिहासिक अवसर पर विधायकगण, विभिन्न बोर्ड/आयोग/मंडल/निगम के अध्यक्षगण, अखिल भारतीय सतनाम सेना के पदाधिकारी, जनप्रतिनिधिगण एवं बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे। अंत में परम पूज्य गुरु घासीदास बाबा के चरणों में नमन करते हुए समस्त प्रदेशवासियों के सुख, शांति, समृद्धि एवं मंगलमय जीवन की कामना की गई।

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